10 भारतीय रेसलिंग जोड़ी जो अपनी दोस्ती के लिए है मशहूर

By   - 28/05/2020

कुश्ती दुनिया का सबसे पुराना खेल है माना जाता है कि कुश्ती की शुरूआत भारत में हुई। पिछले एक दशक में भारतीय पहलवानों ने कुश्ती में अच्छा प्रदर्शन किया है अच्छे प्रदर्शन करने के लिए आपको प्रैक्टिस की जरुरत होती है और प्रैक्टिस के लिए आपको एक साथी की जिसके साथ आप प्रैक्टिस कर सको ।

आज हम आपको ऐसे ही 10 रेसलर की दोस्ती के बारे में बताएंगे जो रियल लाइफ में भी ‘बेस्ट फ़्रेंड’ है

बजरंग पूनिया और जितेंदर कुमार

बजरंग और जितेंदर अच्छे दोस्त हैं और सोनीपत में एक अपार्टमेंट में रहते हैं। शाको बेंटिनिडिस के साथ दोनों प्रैक्टिस करते है और एक दूसरे को लंबे समय से जानते हैं। जितेन्द्र का कहना है कि वे अपने दोस्त और कोच के साथ अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम पर चर्चा करते हैं और बजरंग उन्हें उनके प्रशिक्षण पर ध्यान देने की सलाह देते रहते है।

“बजरंग भाई और मैं ऐसी बातों पर चर्चा करते हैं। और वह मुझे प्रशिक्षण पर केंद्रित रहने की सलाह देता है और बताते है इस बात की चिंता नहीं करना है कि कौन सा पहलवान आ रहा है या नहीं जा रहा है। यह मुझे शांत और केंद्रित रहने में मदद करता है”।

दोस्ती का नाता सबसे अच्छी भावनाओं में से एक है जिसे एक व्यक्ति अनुभव कर सकता है। भारतीय पहलवान जितेन्द्र की यह इंस्टाग्राम पोस्ट आपको यकीन दिला देगी। 26 वर्षीय ने हाल ही में बजरंग पुनिया और मंकी टीम के साथ अपनी दोस्ती की तुलना की।

“मारी दोस्ती कोई Nirma_powder नहीं है, जो पहले इस्तमाल करे और फिर विश्वास करे, हमारी दोस्ती तो L_I_C है ,जो ज़िंदगी के “साथ”भी “ज़िंदगी “ के बाद भी…!

दीपक पूनिया और रवि दहिया

दीपक पुनिया और रवि दहिया भारतीय कुश्ती के जय-वीरू हैं। दोनों ही प्रसिद्ध छत्रसाल अखाड़ा के होनहार पहलवान हैं। 2010 में दहिया अकादमी में शामिल हुए, पुनिया ने 2015 में प्रवेश लिया। दोनों पहलवानो ने टोक्यो ओलिंपिक के लिए भारत को कोटा दिलाया है। लेकिन अब, कोरोनोवायरस लॉकडाउन के कारण, दहिया वर्तमान में छत्रसाल अखाड़ा में फँस गए हैं, पुनिया झज्जर में अपने गांव में हैं। लॉकडाउन जल्द ही समाप्त होने की कोई उम्मीद नहीं है, दोनों पहलवान एक दूसरे को मिस कर रहे हैं और व्हाट्सएप के जरिए एक दूसरे के टच में है।

“हां, मुझे उनकी उपस्थिति याद आती है। हम फोन और कभी-कभी व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क में रहते हैं और यही सब हम कर सकते हैं। जब चीजें सामान्य थीं, तो हम एक साथ अभ्यास करते थे और सुनिश्चित करते थे कि हम लगभग सभी प्रशिक्षण सत्रों में साझेदार रहे , ”रवि दहिया ने रेसलिंगटीवी को बताया।

अखाड़े में अपने समय के दौरान, दोनों पहलवान प्रशिक्षण सत्र के बाद एक साथ बैठते थे और अपनी कमियों पर चर्चा करते थे उन्हें कैसे ठीक किया जाए। इसके अलावा, वो अपने साथी पहलवानों के साथ मज़ाक करते थे

दहिया ने पुनिया के लिए कहा, “हम सामान्य रूप से प्रशिक्षण और कुश्ती से संबंधित रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए एक साथ बैठते हैं। कभी-कभी हम एक-दूसरे की टाँग खींचते चले जाते। यहाँ उनके साथ अच्छा समय बिता रहा था, ”22 वर्षीय विश्व पदक विजेता ने रेसलिंगटीवी को बताया।

पुनिया भी दहिया की भावनाओं को साझा करते हैं। वह कहते है, “हाँ, उसकी अनुपस्थिति को महसूस करना स्पष्ट है। लेकिन हम फोन के माध्यम से संपर्क में रहते हैं, इसलिए यह एक प्लस पॉइंट है ”।

“उसने दूसरे दिन मुझे फोन किया। और हमने विभिन्न चीजों के बारे में बात की। यह अच्छा लगा, “विश्व रजत पदक विजेता ने बताया।

विनेश फोगाट और प्रियंका फोगाट

विनेश की छोटी बहन प्रियंका उनकी सबसे अछि दोस्त है वो हर समय उनके साथ ही रहती है। विनेश इन दिनों अपने घर खरखौदा गाँव , हरियाणा में है और एक स्कूल में अपनी बहन प्रियंका के साथ प्रशिक्षण ले रही है। वह स्थिति सामान्य होने और ओलंपिक के सपने को पूरा करने के लिए मैट पर लौटने का इंतज़ार कर रही है । वर्ल्ड चैंपियन ने अपने इंस्टाग्राम पर एक ‘स्पेशल पोस्ट’ शेयर की जिसमे वो अपनी शादी के जोड़े में अपनी बहन प्रियंका के साथ है। उन्होंने बताया उनकी बहन उनकी सबसे खास दोस्त है दोनों के बीच अटूट प्यार है

वर्ल्ड मेडलिस्ट ने अपनी बहन के लिए अपना प्यार साझा करते लिखा आप मेरे लिए बहुत स्पेशल हो, हम अच्छे दोस्त है और तुम मेरे सारे सीक्रेट्स भी जानती हो। कल्पना से परे, मुझे पता है कि तुम पूरी दुनिया में मेरी सबसे अच्छी बहन हो।

विनेश और प्रियंका साथ में ही रहते है अभी तो फ़िलहाल वो घर पर ही प्रैक्टिस कर रहे है लेकिन प्रियंका उनके साथ इंडिया से बहार के कैम्प भी अटैनेड करती है। पिछले साल विनेश अपनी कोच के अकोस के साथ बुल्गारिया कैंप के लिए गई थी जिसमे प्रियंका भी शामिल थी। प्रियंका बैंकाक में हुए साल 2016 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में 55 किग्रा वर्ग में रजत पदक विजेता है। अभी प्रियंका, विनेश के नक्शे कदम पर चलने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

साक्षी मालिक और निशा दहिया

ओलिंपिक मेडलिस्ट साक्षी मालिक, निशा के लिए हमेशा से रोल मॉडल रही है साक्षी ने निशा को डोप से उभरने मैं काफी मदद की है और हर टाइम वो निशा को खेल के लिए मोटीवेट करती रहती है और साथ में ही दोनों प्रैक्टिस करते है। साक्षी निशा की रोल मॉडल होने के साथ-साथ उनकी अच्छी दोस्त है। दहिया ने कहा, “प्रतिबंध के बाद से मैं उसके बहुत करीब हूं।” “मैं उसके साथ अखाड़े में और यहां तक कि शिविरों में पार्टनर के रूप में प्रशिक्षित करती हूं वि मेरी रोल मॉडल तो है ही साथ में मेरी अच्छी दोस्त है ।”

 

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Sisters are angels who lift up when our wings forget how to fly????@sakshimalik_official

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“मेरी इंस्पिरेशन साक्षी मालिक है उनको मैट पर देख कर जुनून आ जाता है साक्षी दीदी को देख कर अपने आप को में बहुत स्ट्रांग फील करती हू। क्योंकि की वो बहुत ज्यादा स्ट्रांग है वो ओलिंपिक मेडलिस्ट होने के साथ ही बहुत अच्छी रेसलर भी है उनसे मुझे बहुत ज्यादा सिखने को मिलता है”।

सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त

इन दोनों ने भारतीय कुश्ती को देखने के तरीके को बदल दिया है। भारत के एकमात्र दो बार के ओलंपिक पदक विजेता 37 वर्षीय सुशील कुमार और लंदन 2012 के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त की दोस्ती काफी पुरानी है। दोनों की दोस्ती की शुरुआत साल 1997 से शुरू हुई

“हम छोटे बच्चे थे। हम भाई नहीं हैं, लेकिन हम असली भाइयों से कम नहीं हैं। हमने एक-दूसरे की सफलताओं और असफलताओं को देखा है और उनसे मिलकर निपटा है” सुशील कुमार ।

एक बार अमेरिका में एक टूर्नामेंट के दौरान, सुशील कुमार खेल के बाद सांस लेने के लिए हांफ रहे थे और योगेश्वर से कहा, ‘भाई आज मुझे लगता है कि मैं आज मर जाऊँगा”। योगेश्वर ने कहा, ‘जब तक मैं यहाँ हु , तब तक कुछ नहीं होगा।’ उन्होंने सुशील से कहा वो उन्हें इतनी जल्दी नहीं जाने देंगे। योगेश्वर ने हमेशा सुशील को खुद से आगे रखा है।

योगेश्वर दत्त ने बताया, “हम हमेशा एक ही कमरे में एक साथ रहे हैं और हमेशा एक ही टूर्नामेंट में पदक जीते हैं। हमारी आदतें भी एक जैसी हैं। आप कह सकते हैं कि हम एक दूसरे की कार्बन कॉपी हैं”।

सोनम मलिक और अंशु मलिक

सोनम और अंशु दोनों एक ही बैच की रेस्टलेर्स है दोनों साथ में ट्रेनिंग करते है और कैंप में एक ही कमरे में रहती है हाल ही में दोनों युवा पहलवानो ने अपने दोस्ती के साथ अपने हुनर का डंका भी बजवाया। सोनम ने नेशनल ट्रायल्स में ओलिंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक को 62 किलो दो बार हराया हराया और अंशु ने 57 किलो में वर्ल्ड मेडलिस्ट पूजा ढांडा को। दोनों अभी लॉकडाउन के चलते अपने घरो पर है और आने वाली चुनौतियों और ओलिंपिक के लिए खुद को तैयार कर रहे है। दोनों युवा पहलवान रोज़ एक दूसरे के साथ फ़ोन के जरिये अभी टच में है और ट्रेनिंग के बारे में बात होती रहती है।

पूजा ढांडा और पूजा कागरा

वर्ल्ड मेडलिस्ट पूजा ढांडा और पूजा कागरा दोनों सालों पुराने दोस्त है दोनों हिसार हरियाणा में ही रहते है और ट्रेनिंग करते है। ढांडा जब कुश्ती में काफी आगे निकल चुकी है लेकिन उनकी दोस्त उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाई। लेकिन आज दोनों में आज भी उतनी ही अच्छी दोस्ती है जितने पहले थी। इससे को सच्ची दोस्ती कहा जाता है। वर्ल्ड मेडलिस्ट ने कई बार इंस्टाग्राम पर अपनी दोस्त के पोस्ट शेयर किए और कहा “अपने दोस्त के साथ टाइम बीतने से अच्छी कोई थेरेपी नहीं है मेरी बेस्ट फ्रेंड ”

अमित दहिया और सुमित मलिक

कभी इंडियन रेसलिंग के ‘वंडर बॉय ‘ कहे जाने वाले रेसलर अमित दहिया जब से लॉकडाउन हुआ छत्रसाल स्टेडियम को छोड़ कर अपने गांव नाहरी सोनीपत, हरियाणा अपने घर लोट गए। 7 साल की उम्र से रेसलिंग शुरू करने वाले पहलवान दहिया के लिए ऐसा पहली बार है जब वो छत्रसाल स्टेडियम में प्रक्टिस के लिए नहीं है। दहिया इन दिनों अपने रूम पार्टनर और करीबी दोस्त सुमित को मिस कर रहे है दोनों सालों से साथ है और यह पहला मौका है जब दोनों को 2 महीने से ज्यादा हो गए है एक-दूसरे से मिले हुए। दोनों साथ में छत्रसाल स्टेडियम में प्रैक्टिस करते है।

उत्कर्ष काले और स्वपनिल

दोनों ने 12 साल की उम्र में श्री छत्रपति व्यामशाला, भावनीनगर से रेसलिंग की शुरुआत की थी। साथ में 2 साल तक प्रैक्टिस की उसके बाद दोनों प्रैक्टिस के लिए अलग-अलग रेसलिंग अकडेमी में चले गए। दोनों एक ही वेट केटेगरी में रेसलिंग करते आए है और नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर मैडल जीत चुके है लेकिन उनकी दोस्ती में कभी कोई मतभेद नहीं हुआ। दोनों को काफी सालों बाद अपने पुराने अखाड़े छत्रपति व्यामशाला एक साथ प्रैक्टिस की और इंस्टाग्राम पर वीडियो भी शेयर किया।

नैना कंवल और पूजा गहलोत

नैना और पूजा होनहार युवा महिला पहलवान है दोनों ने कम उम्र में ही बहुत कुछ हासिल कर लिया है और आगे जाकर दोनों देश के लिए मैडल जीत सकने की क्षमता रखती है। पूजा गहलोत ने नवंबर में बुडापेस्ट में यू 23 विश्व कुश्ती (कुश्ती) चैंपियनशिप में अपनी ताकत और प्रतिभा दिखाई। 22 वर्षीय ने 53 किलोग्राम भार वर्ग में भारत के लिए रजत पदक जीता। वही नैना U-23 एशिया चैंपियनशिप 2019 की गोल्ड मेडलिस्ट है

 

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