मिलिए 10 भारतीय पहलवानों से, जिन्होंने देश के लिए जीता ‘वर्ल्ड मेडल’

By   - 24/10/2020

रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन हर चैंपियनशिप में बेहतर होता जा रहा है है। अब तक मेन फ्रीस्टाइल में टोटल 12 मेडल देश को मिले है जिसमे 1 गोल्ड, 4 सिल्वर और 7 ब्रोंज मेडल शामिल है। इसमें सबसे ज्यादा वर्ल्ड मेडल बजरंग पूनिया के नाम है। उन्होने अब तक वर्ल्ड चैंपियनशिप में 3 मेडल हासिल किए है और ऐसा करने वाले पहले भारतीय है। तो आइए जानते है ओर किस पहलवान ने देश को कितने और कौन-कौन से मैडल देश को दिलाए है।

राहुल अवारे (2019)
महाराष्ट्र के बीड़ जिले के छोटे से गांव पतारी के रहने वाले राहुल का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। कुश्ती के लिए राहुल को सिर्फ 10 साल की उम्र में अपना घर छोड़ना पड़ा और वे पुणे आ गए। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले राहुल को हर महीने तकरीबन 5 से 10 हजार रुपए की जरुरत होती थी, जिसे उनके पिता ने बड़ी मुश्किलों से पूरा किया। आज राहुल का नाम देश के बड़े पहलवानो में शुमार है। पहलवान ने साल 2019 में वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रोंज मैडल जीता था और साल 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड अपने नाम किया था। राहुल महाराष्ट्र के पहले ऐसे रेसलर है जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप का मैडल जीता है। यह मैडल जीतना उनके करियर की अभी तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। “भारत के लिए एक विश्व चैंपियन में पदक जीतना मेरे लिए बहुत बड़ी अचीवमेंट है मैं खुश हूँ देश के लिए मैडल जीतकर और मुझे गर्व है मैं महाराष्ट्र का पहला ऐसा रेसलर हूँ जिसने वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए मैडल जीता” राहुल ने कहा।

कांस्य पदक जीतने के बावजूद राहुल टोक्यो ओलंपिक-2021 में खेलने नहीं जा पाएंगे क्योंकि राहुल का 61 किग्रा भार वर्ग ओलंपिक कोटा नहीं है। लेकिन मराठा रेसलर का अगला टारगेट ओलंपिक मैडल जीतना है टोक्यो ओलंपिक ना सही वो साल 2024 में होने वाले ओलंपिक में अपनी दावेदारी पेश करेंगे । “देश के लिए मेने बहुत मैडल जीते है लेकिन ओलंपिक मैडल मेरा और मेरी फैमिली का ड्रीम है। हम जब तक कोशिश करते रहेंगे, हमे यह मिल नहीं जाता। इस साल नहीं तो अगले ओलंपिक में खेलेंगे” राहुल।

रवि दहिया (2019)
22 वर्षीय पहलवान छत्रसाल स्टेडियम की देन है जहा से दो ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त निकले हैं। वह दस साल पहले अपने गांव नाहरी से यहां आए थे और तब वह केवल 12 साल के थे। दहिया ने साल में 2015 जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में 55 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में रजत पदक जीता। 2017 में एक चोट के कारण एक साल से अधिक समय के लिए खेल से दूर रहना पड़ा। अपने वापसी वर्ष में, उन्होंने बुखारेस्ट में 2018 विश्व U23 कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता, प्रतियोगिता में भारत का एकमात्र पदक, 57 किग्रा वर्ग में आया। साल 2019 में दहिया ने अपनी पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रोंज मैडल जीता कर देश को 57 किलो ग्राम वर्ग में ओलंपिक कोटा दिलाया। इसके बाद उन्होंने इस साल की शुरुआत में एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल जीता।

दीपक पूनिया (2019)
हरियाणा के झज्जर डिस्ट्रिक्ट में दीपक पूनिया का जन्म हुआ था और इस इलाके में रेसलिंग को लेकर एक अलग जूनुन देखने को मिलता है। 5 साल की उम्र में ही दीपक ने अपने गांव में मौजूद आखाडा में प्रैक्टिस करना स्टार्ट किया । वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल जीतने वाले भारतीय रेसलर दीपक पूनिया 86 किलोग्राम भारवर्ग में नंबर 2 रेसलर है । दीपक ने पहली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और वो फाइनल तक पहुंच गए। वे चोट के कारण फाइनल मुकाबले से बाहर हो गए थे। ईरान के हसन याजदानी को स्वर्ण पदक मिला था। दीपक ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जीत हासिल करके भारत के लिए ओलंपिक कोटा भी प्राप्त कर लिया है और वो ओलंपिक पदक जीतने के प्रबल दावेदार है । दीपक पुनिया ने भी तक शानदार प्रदर्शन कर कई ख़िताब अपने नाम किये है। वो वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल, जूनियर वर्ल्ड में सिल्वर और गोल्ड, कैडेट वर्ल्ड में गोल्ड और एशियाई चैंपियनशिप में दो बार ब्रोंज मैडल जीत कर अपने नाम कर चुके है ।

नरसिंह यादव (2015)
नरसिंह यादव ने 13 साल की उम्र में अपने भाई विनोद के साथ रेसलिंग शुरू की थी। जो खुद एक पहलवान है। नरसिंह ने मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में कुश्ती के दांव पेच सीखे। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद पहली बार नरसिंह को कुश्ती में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। साल 2014 के एशियन गेम्स में जब उन्हें कांस्य पदक मिला, तो उनके कोच काफी प्रभावित हुए। उन्होंने जापान के पहलवान को हराकर कांस्य पदक जीता था। वर्ष 2012, नरसिंह पंचम यादव लंदन ओलंपिक में अपनी पहली ही बाउट हार गए थे। उन्हें कनाडा के मैट गैंट्री ने हराया था। उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा लम्हा 2015 में उस समय आया जब उन्होंने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर 74 किलोग्राम भारवर्ग में रियो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाइ किया। साल 2016 में उनपर 4 साल का बैन लगा था जो इस महीने ख़त्म हो जायेगा और वो टोक्यो ओलंपिक के लिए 74 किलो ग्राम वर्ग में अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

अमित दहिया (2013)
लंदन ओलंपिक में महज 18 वर्ष की उम्र में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद नाहरी गांव के पहलवान अमित दहिया ने ग्लास्गो, स्काटलैंड में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश और हरियाणा का नाम रोशन किया । मात्र 20 वर्ष की आयु में राष्ट्रमंडल खेलों की कुश्ती स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाला वह देश का सबसे कम उम्र का पहलवान है। अब तक के करियर में अमित ने मैडल बहुत जीते, सितंबर, 2013 में हगरी की राजधानी बुडापेस्ट में आयोजित विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। साल 2011 में इंडोनेशिया में हुई जूनियर एशियन कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड जीता। उसी वर्ष अमेरिका में हुए कुश्ती कप में देश का प्रतिनिधित्व किया और गोल्ड मैडल जीता। कोरिया में हुई सीनियर एशिया चैंपियनशिप कास्य पदक।

बजरंग पूनिया (2013)
वर्ल्ड मेडलिस्ट बजरंग पूनिया वर्ल्ड के बेस्ट रेस्टलेर्स में से एक है अभी उनकी वर्ल्ड रैंकिंग नंबर 2 है जबकि इस से पहले वो नंबर 1 थे । बजरंग ने भारत क लिए अनेक मैडल जीते है जिसमे वो 3 बार के वर्ल्ड और 6 बार के एशियाई चैंपियनशिप मेडलिस्ट है। उन्होंने अपना पहला वर्ल्ड ब्रोंज मैडल साल 2013 में जीता था। उसके बाद उन्होंने मैडल का रंग बदला और 2013 में सिल्वर मैडल अपने नाम किया। साल 2019 में बजरंग ने देश के लिए ब्रोंज मैडल और अपना तीसरा वर्ल्ड मैडल जीतते हुए इतिहास रचा और ऐसा करने वाले वो पहले भारतीय बने साथ ही उन्होंने देश के लिए 65 किलो ग्राम वर्ग में ओलंपिक कोटा भी हासिल किया। अभी सबसे बड़ा मैडल उनकी इस उपलब्धि में जुड़ना बाकि है वो है ओलंपिक का मैडल, जिसके लिए वो दिन रत एक कर मेहनत कर रहे है और वो इस पदक को जीतने के सबसे बड़े दावेदार भी है ।

सुशील कुमार (2010)
सुशील कुमार पहले ऐसे भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्‍होंने दो ओलंपिक मेडल जीते हैं। उनके नाम सिल्‍वर और ब्रॉन्‍ज मेडल हैं। यह मेडल उन्‍होंने दो लगातार ओलंपिक में जीते थे। 2008 बीजिंग ओलंपिक खेलों में उन्‍होंने ब्रोंज मैडल जीता था और 2012 में लंदन ओलंपिक में सिल्‍वर मेडल अपने नाम किया था। रेसलिंग में ओलंपिक में पदक जीतने वाले दूसरे पहलवान हैं। उनसे पहले केडी जाधव ने 1952 के खेलों में कांस्‍य पदक जीता था। लेकिन सुशील के मैडल ने भारतीय रेसलिंग को फिर से खड़ा करने में एक महत्पूर्ण भूमिका निभाई है। आप कह सकते है रेसलिंग को उसका दर्जा जो था वो वापस दिलवाया। साल 2010 में मास्को में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में, सुशील कुमार ने इतिहास रचा जब वे कुश्ती में विश्व खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने. उसी वर्ष, उन्होंने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में 66 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था

रमेश कुमार गुलिया (2009)
रमेश कुमार गुलिया का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के पुरखास गांव में हुआ था। रमेश कुमार ने 2009 में डेनमार्क के हेरिंग में वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में फ्रीस्टाइल 74 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह कारनामा उन्होंने 42 साल बाद देश को वर्ल्ड चैंपियनशिप में मैडल दिला कर किया। रेसलर रमेश ने कुश्ती के दांव-पेंच कैप्टन चांद रूप और छोटू राम अखाड़े में सीखे थे। 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों में, उन्होंने 66 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। 2002 में, उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

बिशम्बर सिंह(1967)
बिशम्बर सिंह एक सेवानिवृत्त भारतीय बैंटमवेट पहलवान हैं। 1966 में उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक और एशियाई खेलों में कांस्य, दोनों फ्रीस्टाइल कुश्ती में जीते। अगले साल उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता, वह पहले भारतीय हैं जिन्होंने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। उन्होंने 1964 और 1968 में फ्रीस्टाइल और ग्रीको-रोमन डिवीजनों में 1964 में फ्रीस्टाइल में छठे स्थान के सर्वश्रेष्ठ परिणाम के साथ प्रतिस्पर्धा की।

उदय चंद (1961)
पहलवान उदयचंद के कैरियर की शुरुआत ही उस समय हुई थी जिस समय खेलो की हालत बहुत खराब थी। जीतने पर भी कोई नही पहुँचता था । देश मे खेल संघों के अध्यक्ष उद्योगपति होते थे । लेकिन खिलाड़ी एक-एक पैसे के मोहताज हुआ करते थे । पहलवान उदयचन्द कुश्ती जगत का वो कोहिनूर है जिन्होंने योकोहामा 1961 में हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रोंज मैडल जीता था। पहलवान उदय चंद आजाद भारत के पहले व्यक्तिगत वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के पदक विजेता है। पहलवान उदय चंद जी अपने भाई हरिराम के साथ विश्व चैंपियनशिप मे हिस्सा लेने साथ गये थे भारत के इतिहास मे ऐसा पहली बार था कि एक मॉ के दो बेटे विश्व चैंपियनशिप मे गये हो।

पहलवान उदय ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के अपने अनुभव के बारे में कहा, “उस समय बहुत खुशी हुई थी। भारत मां के दो सपूत पहली बार विश्व चैंपियनशिप में गए थे। बड़े भाई का नाम था हरिराम। हम दोनों भाई गए थे और यह मेरे लिए बेहद खास था।”

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