टोक्यो की तैयारी के लिए बजरंग पूनिया पहुंचे ओलंपिक चैंपियन के पास

By   - 09/07/2020

फरवरी में, एशियाई चैंपियनशिप में ब्रोंज मैडल जीतने के बाद, बजरंग पूनिया और उनके कोच शाको बेंटिनिडिस अपनी टोक्यो ओलंपिक की तैयारी शुरू करने के लिए तैयार थे। लेकिन कोरोनावायरस के प्रकोप ने सभी योजनाओं पर पानी फेर दिया। पूनिया ने कई मौक़ों पर दावा किया है कि वह ‘अगस्त के पहले सप्ताह’ में खेलने के लिए तैयार थे। हालांकि, महामारी के कारण, उन्हें सोनीपत में अपने अपार्टमेंट में ट्रेनिंग करनी पड़ी।

इस समय बजरंग अपने साथी जितेंदर के साथ बैंगलोर में ट्रेनिंग कर रहे है कुछ दिनों पहले ही बजरंग ने सोनीपत से बैंगलोर जाना का फैसला किया। “हम (जितेन्द्र और बजरंग) हमारे अपार्टमेंट में ट्रेनिंग करते थे। लॉकडाउन अनलॉक होते ही हमने घरेलू उड़ानों के फिर से शुरू होने पर ट्रेनिंग के लिए आईआईएस सेंटर आने का फैसला किया”।

प्रोटोकॉल के अनुसार आने पर, पूनिया को क्वारंटाइन में रखा गया था जिसके बाद उन्होंने अपनी ट्रेनिंग शुरू की । उन्होंने अपने ट्रेनिंग सेशन की तस्वीरें इंस्टाग्राम और ट्विटर पर शेयर कीं। उनके प्रशिक्षण की निगरानी 2004 के ओलंपिक चैंपियन क्यूबा के यैंड्रो क्विंटाना द्वारा की जाएगी। दूसरी ओर, कोच शाको, बजरंग के लिए डेली रूटीन तैयार कर के भेजते है ।

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उन्होंने कहा, “वो मेरे कार्यक्रम की योजना बनाएंगे। कोच शाको नियमित तौर से मेरे संपर्क में है और वो मुझे रोज़ का ट्रेनिंग रूटीन देते है। हालात सामान्य होने के बाद वो जल्द ही मेरे पास आ जाएंगे। “ऑनलाइन निर्देशों के साथ प्रशिक्षित करना मुश्किल है। मैट पर टैनिंग करते हुए एक कोच की उपस्थिति ग़लतियों को बताने में बहुत मदद करती है। लेकिन अभी ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता है। एक विदेशी कोच (क्विंटाना) है जो मेरे प्रशिक्षण की निगरानी करेंगे। यह यहां एक अच्छी सुविधा है और किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं है, इसलिए यह सुरक्षित भी है”।

26 वर्षीय चार भारतीय पहलवानों में से एक हैं जिन्होंने नूर-सुल्तान में 2019 विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद टोक्यो ओलंपिक कोटा हासिल किया। अन्य तीन हैं रवि दहिया (57 किग्रा), दीपक पुनिया (86 किग्रा) और विनेश फोगट (53 किग्रा)। पुनिया को अब जो भी समय मिल रहा है, वह इसका इस्तेमाल मैट पर अपने कौशल को मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं। “आपको सकारात्मक पक्ष को देखना होगा। अब यह समय हमारा सहयोगी है, हमें इसका उपयोग अपने फायदे के लिए करना है। अभी हर एथलीट एक जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। मेरी सारी एकाग्रता मेरी कमियों को दूर करने पर है। और अगर मैं इसे सही से करता हूं, तो 2021 में ओलंपिक के आने तक मैं बेहतर ओर हो जाऊँगा”।

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