Bhai Dooj Special: जब भाई ने बहन को पहलवान बनाने के लिए छोड़ी अपनी पहलवानी

By   - 16/11/2020

एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर रेसलर दिव्या काकरान ने अपने परिवार का सपना साकार किया है। दिव्या को यहां तक पहुंचाने में उनकी मेहनत के अलावा पिता सूरज पहलवान की कोशिशें और बड़े भाई देव की कुर्बानी भी अहम रही हैं। दिव्या के बड़े भाई देव भी पहलवानी करते थे। घर की माली हालत अच्छी नहीं थी। पिता सूरज परिवार का पेट पालने के लिए दंगलों में लंगोट बेचते थे। ऐसे में बड़े भाई देव ने जब बहन में अपने से बेहतर संभावनाएं देखीं तो उन्होंने पिता के साथ मिलकर दिव्या को ही आगे बढ़ाने की ठान ली।

इसके लिए उन्होंने अपनी पहलवानी और पढ़ाई, दोनों छोड़ दी। देव इसके बाद दिव्या को स्कूल और अखाड़े, दोनों जगह छोड़ने जाने लगे। उन्होंने हर कदम पर दिव्या का साथ दिया। आज दिव्या की कामयाबी से वह बेहद खुश हैं। वह कहते हैं, ‘दिव्या में शुरू से ही जीतने का ज़ज़्बा था। वह मेहनती भी खूब थी। आज उसकी मेहनत रंग ला रही है।

अपने भाई के योगदान पर दिव्या कहती हैं, “भाई ने मेरे लिए अपनी पढ़ाई और पहलवानी भी छोड़ दी। 12 बजे के बाद लड़कों का स्कूल होता था, उसके मास्टर बोलते थे कि 1 बजे आना है लेकिन वो बोलता था कि मुझे अपनी बहन को अभ्यास कराना है। उसने स्कूल जाना यह कहकर छोड़ दिया कि मुझे अपनी बहन को कुछ बनाना है” दिव्या ने रेसलिंगटीवी को बताया ।

 

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दिव्या आज जहां अपने करियर में है उसका श्रेय भाई देव काकरान और दोस्त नीना को देती है। दिव्या का कहना है की इन दोनों के कारण ही आज वह इस ऊंचाई तक पहुंचने में सफल रही हैं और इन दोनों का बलिदान का उनके करियर बड़ा रोल रहा है।

“मेरी दोस्त है नीना। उसने मेरा काफी साथ दिया है। उसे मैं कभी नहीं भूल सकती। वो शिविर में मेरे साथ ही रहती है। मैंने हार के बाद उससे कहा कि मैं कुछ भी नहीं कर सकती। तो उसने कहा कि भगवान आपकी परीक्षा ले रहे हैं। इसलिए जो होता है अच्छे के लिए होता है। अगर आप हारती नहीं तो आपको आपकी गलती पता नहीं चलता। उसने दिन-रात मुझे समझाया तभी मैं आत्मविश्वास हासिल कर पाई”।

दिव्या काकरान के भाई देव उनको दूसरे खिलाड़ियों के वीडियो निकालकर देते है ताकि उनको अपने विरोधी पहलवान की ताकत और कमिया पता चल सके ।

दिव्या ने बताया , “मेरा भाई भी मुझे अभ्यास कराता है। उसने जापानी खिलाड़ियों की कुश्ती निकालीं। उसने उनके अभ्यास सत्र के वीडियो निकाले लेकिन तब मैंने नहीं किया मैं सोचती थी इनसे क्या होगा। लेकिन जब मैंने उनकी बात मानी तो मुझे इसका फायदा हुआ”।

जब राष्ट्रीय शिविर होता है तो नीना उनके साथ  शिविर में रहती है और भाई बहार किराये पर कमरा लेकर बहार रहता है ।

“नीना राष्ट्रीय शिविर में मेरे साथ ही रहती हैं और भाई लखनऊ में साई सेंटर के बाहर एक कमरा किराए पर लेकर रहता है। समय मिलने पर देव अभ्यास कराने आता है” दिव्या ने बताया ।

दिव्या को अभी भी लगता है कि उनके खेल में कमियां है, जिन्हें उनके भाई और नीना जानते है  “मुझे अभी भी लगता है कि मेरे खेल में अभी भी काफी कमियां हैं जो मुझे नहीं पता। इन दोनों को पता हैं। अपने आप को भाग्यशाली मानती हूं कि ये निस्वार्थ भाव से मेरे साथ काम कर रहे हैं। ये मुझे आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। मेरे अंदर कभी घमंड भी आ जाता है तो यह दोनों मुझे सचेत कर देते हैं” दिव्या ।

दिव्या के स्वर्ण पदक जीतने की खुशी भाई देव काकरान और दोस्त नीना के चेहरे पर देखते ही बनती थी। देव खुद तो पहलवान नहीं बन पाए, लेकिन वह मैट पर बहन के साथी बन गए।

“जब मैंने एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल जीता तो मुझसे ज्यादा खुशी भाई देव काकरान और मेरी दोस्त नीना के चेहरे पर देखते ही बनती थी। मेरे करियर में इस ऊंचाई तक पहुंचने में इन दोनों का बहुत रोल रहा है यह दोनों ना होते तो शायद आज में यहाँ नहीं होती” ।

 

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