From being truck driver to Indian wrestler – Sonaba Gongane tells his own story

By   - 06/12/2019

Sonba Gongane – Indian Wrestler

A silver medal at the wrestling nationals is a big achievement for anyone, especially one who had once quit the sport and drove a truck — without licence — to support himself and his family for four years. Its been a long journey since than – just hear it out from the champion himself how he cleared every obstacle that came in his way, how he drove truck for years and how this journey on the same truck brought him back to the sport and how he is now Indian wrestling’s (Kushti) one of the brightest prospect for the future. The journey of Sonba Gongane, the journey from a Truck Driver to the Indian national wrestler narrated by Sonba himself.

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How I started Wrestling – My first tryst with the sport

2005 में मैंने रेसलिंग की सुरूआत की थी खूबलार अखाड़े में प्रैक्टिस करता था वहाँ मेरे कोच दाहनाजी और बाजिराओ पाटिल थे मेरे घर से 2 किलो मीटर दुरी पर अखाडा था में पैदल ही जाया करता था

गांव में एक ही टाइम जब प्रैक्टिस हुआ करती थी मैं शाम को 5 बजे प्रैक्टिस करने जाता था कभी-कभी जब देर हो जाती थी 9-10 बज जाते थे तो पिताजी साइकिल से मुझे लेने आते

6 साल की उम्र में रेसलिंग खेलना शुरू किया मेरे नाना जी मुझे कंधे पर उठाकर दंगल दिखाने दे जाया करते थे वहां मैं जब कुश्ती  जीतता था तो मुझे पैसे मिलते थे वहीं से रस्टलिंग में मेरा इंटरेस्ट पैदा हुआ

उसके बाद से पिताजी भी मुझे बोलते थे अगर में प्रैक्टिस पर नहीं जाता था के आज तु कियो नहीं गया

मेरी पढ़ाई जैसे सभी पहलवानों की होती है वैसे ही चली

My Journey from village to Kohlapur  & Initial struggles

जब मैं गांव में अच्छा लड़ने लगा तो कोल्हापुर के एक पहलवान ने मुझे बोला तुम मेरे साथ रह लो और वह मुझे अपने साथ ले गया  उस समय गांव में बात चलती थी कि कोल्हापुर में अच्छे अखाड़े होते हैं तो बस यही था कि मुझे वहां जाना है

घर की फाइनेंसियल कंडिशन अच्छे नहीं थी पिताजी ने कोहलापुर मुझे किसी तरह भेज दिया

वहां मैं जिस पहलवान के साथ रहता था उसके सारे काम करता जैसे मसाज करना उसके कपडे धोना खाना बनाना फिर वो भी मुझे कुछ मदद करता था मेरा खर्चा देता था

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How I became a Truck Driver and took loan to buy small Tata Tempo 

2009 में मैंने पहलवानी छोड़ दी क्योंकि घर से कुछ खर्च नहीं मिलता था तो मैंने सोचा अब क्या होगा फिर मैं वापस गांव आया दो-तीन महीने गांव में ही रहा फिर कुछ समय काम करने का सोचा फिर एक टेम्पू लिया मैंने टाटा ऐस का टाटा का पहले से हाथ है मुझ पर गांव के बैंक से 1.50 लाख  लोन ले कर मैंने  सेकंड हैंड टेम्पू लिया था फिर मैंने सामान उसमे लाना ले जाना सुरु किया मैं सिटी में नहीं ले जाता था टेम्पू को लेकर किय्यू की मेरे पास लाइसेंस  नहीं था मेरे उम्र उतनी नहीं थी के में लाइसेंस बन जाये तोह गांव में ही चलता था जो भी काम मिलता था

How from driving truck I landed in Akhara to take up wrestling for lifetime

2012 में मेरा एक दोस्त था जो दिल्ली से स्पोर्ट्स वियर का माल मंगवाता था उसने मुज़से पूछा, तू मेरा साथ आएगा मैंने बोला हाँ में  चलूंगा उस टाइम दिल्ली जाना बहुत बड़ी बात होती थी. जब हम दिल्ली जा रहे थे तो एक रात पहले हम पुणे के एक अखाड़े में रुके वहां मेरी मुलाकात एक पहलवान से हुई उस ने पूछा तुम क्या करते  हो मैंने बताया में पहलवानी करता हू और मेरी पहलवानी करने की इच्छा है फिर वो बोला तुम मेरे साथ आ जाओ में तेरा खर्चा देखता हू तु मेरा काम देख ले फिर में वही सब करने लगा जो पहले करता था उसका खाना बनाना मसाज  और करना

फिर वहां से काका वोहरा के अखाड़े में मैंने  साल प्रैक्टिस की फिर पहली बार २०१३ में मेरा कैडेट नेशनल में मैडल आया उसके बाद से परफॉरमेंस अच्छी होती गई और लगातार मेडल्स आते गए

The Sport of Wrestling, struggles, injuries and way forward

२०१६ में मुझे इंजरी हुई फिर मुझे लगा अब क्या होगा कैसे में रिकवर कर पाउगा मैंने फिर नौकरी करने का मन बनाया उस दोरान मैंने आर्मी ज्वाइन की फिर इंजरी भी ठीक होती गए और फिर २०१७ में  मेरा सीनियर नेशनल में मैडल आया फिर वहां से २०१८ में कैंप में आया

वहां से मैंने वर्ल्ड चैंपियनशिप और रैंकिंग सीरीज में पार्टिसिपेट किया और मेरा 7th  पोजीशन आया था 61kg में. 2019  में वर्ल्ड रैंकिंग इटली में फर्स्ट पोजीशन आई और  उसके बाद एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल आया

Bajrang my idol and my dreams

65 kg में खेलने के आगे प्लान्स है बजरंग पुनीआ मेरे आइडल है और  वही मेरे सामने होंगे बजरंग का हमेशा यही मानना है किसी भी वेट में खेलो जो अच्छा करेगा वही जीतेगा उनके साथ रह कर उन्हें देख कर बहुत मोटीवेट होता हूं और साथ ही जब मैं बजरंग पहलवान के साथ रहता हूं तो मेरे अंदर एनेर्जी आ जाती है अगर मेरा मन नहीं होता प्रैक्टिस का तो उनको देख कर ही मन बदल जाता है

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