गीता फोगाट ने कहा – पिता का अधूरा सपना पूरा कर सकता है छोटा भाई दुष्यंत

By   - 04/08/2020

गीता फोगाट अपने पिता महाबीर फोगाट की हर उम्मीद पर खरी उतरी उन्होंने देश के लिए कई मैडल हासिल किए। 2010 में दिल्ली के कॉमनवेल्थ गेम्स में फ्री स्टाइल महिला कुश्ती के 55 किलो ग्राम वर्ग में गीता ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया और ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय महिला बनीं। गीता फोगाट वीमेन रेसलिंग के लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं। अगर आप कुछ बनने और जीतने की ठान ले तो जीवन में कुछ भी हासिल कर सकते है। लेकिन गीता अपने पिता का एक सपना पूरा नहीं कर पाई जिसके लिए वो आज भी मेट पर वापसी करने की तैयारी कर रही है। और वो सपना है ‘ओलंपिक में मैडल जीतना’।

गीता ने रेसलिंगटीवी के साथ लाइव चैट में बताया की यह सपना उनकी कोई बहन या उनका छोटा भाई दुष्यंत फोगाट पूरा कर सकता है। “पिताजी का जो एक सपना पूरा नहीं हुआ वो है ओलंपिक में मैडल जीतना। अब कोई हमारी बहन या छोटा भाई दुष्यंत जो अभी रेसलिंग में आ रहा है वो इसको पूरा कर सकता है”। गीता ने हिंट दिया की उनका भाई इस सपने को पूरा कर सकता है।

साल 2012 में जब गीता फोगाट ओलंपिक में मैडल नहीं जीत पाई। वो अपने पहले ही राउंड में कनाडा के पहलवान से हर गई उसके बाद गीता को कनाडाई पहलवान के फाइनल में जाने के बाद रेपचेज राउंड में कांस्य पदक जीतने का मौका मिला। लेकिन वो अपना यह मुक़ाबला भी हर गई और उनका ओलंपिक मैडल जीतने का सपना वहीं ख़त्म हो गया। गीता की हार के बाद महावीर फोगाट ने अपने छोटे पहलवान दुष्यंत को कहा के अब वो पहलवानी के लिए सीरियस हो जाये या तो पढ़ाई में अपना ध्यान लगाए।

“जब बड़ी बहन गीता ओलंपिक की पदक की रेस से बहार हो गई तो पिताजी ने कहा अब आपको गंभीर होना पड़ेगा अपने करियर को लेकर या तो आप पहलवानी को गंभीरता से लो या पढ़ाई को दोनों में से एक आपको चुना पड़ेगा। मेरा मन पढ़ाई की तरफ तो बिलकुल भी नहीं था फिर मेने रेसलिंग को चुना और आप कह सकते है मेरा रेसलिंग को गंभीरता से लेने का टर्निंग पॉइंट यही था। अब मैं पूरी तरह से रेसलिंग के लिए ही समर्पित हूँ” दुष्यंत ने कहा।

साल 2019 में फौगाट परिवार से उभरते हुए सितारे पहलवान दुष्यंत ने दिल्ली में हुए स्कूल नेशनल गेम में 80 kg भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता जिसके बाद दुष्यंत ने कहा ” मैं अपने पिता और बहनों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहता हूँ”। फिर इस साल 2020 जनवरी में हुई सब जूनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में दुष्यंत ने अपनी बहनों के नक्शे कदम पर चलते हुए सिल्वर मेडल जीता। नेशनल स्तर पर पहला मेडल जीतकर दुष्यंत ने क्षेत्र और फोगाट परिवार का नाम रोशन किया।

दुष्यंत लॉकडाउन में अपनी बहन गीता-पवन के घर है और वही वो अपनी सुबह शाम की प्रैक्टिस अपने जीजा जी पवन सरोहा द्वारा बनाये अखाड़े में करते है उनका प्रैक्टिस का समय सुबह 6 से 10 बजे तक होता है और शाम में 5 से 7 बजे तक लेकिन दुष्यंत समान्य दिनों में सुबह 4 बजे उठ जाते हैं और तैयार होकर 4.30 बजे तक घर में बने प्रैक्टिस हॉल में पहुंच जाते हैं। यहां 7 बजे तक रेसलिंग की प्रैक्टिस करते हैं। इसके बाद शाम को भी 4.30 बजे से 6.30 बजे तक प्रैक्टिस करते हैं। दुष्यंत गांव में होने वाले दंगल में हिस्सा लेते हैं।

“अभी मैं लॉकडाउन में अपनी बड़ी बहन गीता के घर हूँ कोरोना के कारण मुझे और पवन को पार्टनर की जरुरत थी जो मेरे यहाँ आने से पूरी हो गई है अब हम साथ में सुबह शाम की प्रैक्टिस करते है। और समान्य दिनों में सुबह 4.30 बजे तक घर में बने प्रैक्टिस हॉल में पहुंच जाते हैं और शाम को भी 4.30 बजे से 6.30 बजे तक प्रैक्टिस करते हैं”।

मिशन ओलंपिक 2024
दुष्यंत अभी 17 साल के है और आने वाले एक साल में 18 साल के हो जायेगे। दुष्यंत अपने लक्ष्य 2024 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियों में लगे हुए है वो अभी 80 किलो ग्राम वर्ग में भारत के लिए जूनियर लेवल पर खेल रहे है लेकिन ओलंपिक के लिए वो 86 किलो में खेलेंगे जो किलो भार दीपक पुनिया की है दीपक ने भारत को 86 किलो में टोक्यो के लिए कोटा दिलाया है।

“बस में अपनी तैयारियों में लगा हुआ हूँ। मेरा टारगेट 2024 ओलंपिक में खेलना है। मैं अभी 80 किलो में खेलता हूँ लेकिन ओलंपिक के लिए 86 किलो ग्राम वर्ग में खेलूँगा” दुष्यंत।

गीता भी कर रही है वापसी की तैयारी
गीता फोगाट ने पिछले वीकएन्ड में डेढ़ साल बाद मैट पर कदम रखा। इतने लंबे समय तक कुश्ती से दूर रहने के बाद, उनको थोड़ा अजीब लग रहा था जब उन्होंने ट्रेनिंग करना स्टार्ट किया। हालांकि, समय के साथ, पहलवान का मानना है कि वह अपने सामान्य भार वर्ग में वापसी करने के लिए तैयार हो जाएगी। “अगर सब कुछ ठीक रहा, तो मैं टोक्यो ओलंपिक के लिए 62 किलोग्राम भार वर्ग में जगह बनाऊंगी।”

31 वर्षीय ने आखिरी बार 2018 में कम्पटीशन खेला था जिसके बाद उन्होंने अपने परिवार को समय देने के लिए खेल से दूर रही। इसी साल, उन्होंने बेबी बॉय को जन्म दिया जिसका नाम अर्जुन है। अगर इस साल ओलंपिक आयोजित किया गया होता, उनके पास वापसी का कोई मौका नहीं था। लेकिन कोरोना के कारण ओलंपिक अगले साल के लिए स्थगित होने से , उन्हें ओलंपिक में खेलने का एक मौका बना है।

“मैं अगले दो से तीन महीनों में प्रतियोगिता के लिए तैयार हो जाऊंगी। यह अच्छा है क्योंकि मैं भी वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए कोशिश कर सकती हूं। बाकी यह रैसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया पर होगा कि वे टूर्नामेंट के लिए किसे भेजें, ”उन्होंने इंस्टाग्राम चैट के दौरान रेसलिंगटीवी को बताया।

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