Happy Birthday Guru Satpal – द्रोणाचार्य गुरु सतपाल के करियर के वो 6 बेहतरीन लम्हे जिन्होंने बनाया उन्हें ‘महाबली’: देखें वीडियो

By   - 17/10/2020

दिल्ली के बवाना गाँव में जन्मे सतपाल सिंह की ट्रेनिंग मशहूर गुरु हनुमान के अखाड़े में हुई। गुरु हनुमान से कुश्ती के दांव-पेंच सीखने के बाद जब महाबली सतपाल कुश्ती खेलने के लिए मैदान में उतरे उसके बाद कभी उन्होंने अपने करियर में पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज हम द्रोणाचार्य अवार्डी और पद्म भूषण से सम्मानित महाबली सतपाल के करियर से जुड़े कुछ खास लम्हो को आपके साथ शेयर करने जा रहे है।

सबसे लम्बा कुश्ती मैच
कोच सतपाल सिंह ने 1981 में बेलगाम में अपना सबसे लंबा मैच खेला। यह मुक़ाबला 40 मिनट तक चला। अपने सबसे लंबे बाउट को याद करते हुए कोच सतपाल कहते हैं, “कुश्ती तब कुश्ती से बहुत अलग थी। यह अब बहुत तेज है। यह मैच 40 मिनट के लिए चला। मेने यह मुक़ाबला (रुस्तम-ए-हिंद) दादू चौगुले के खिलाफ खेला था। मुझे उसे नीचे लाने में बहुत समय लगा। ”

उनका सबसे छोटा मैच , पाकिस्तान के एक पहलवान के खिलाफ वाराणसी में खेला गया, यह सिर्फ पांच सेकंड तक चला।

एक ही दिन में लड़ी 21 कुश्तियाँ
सतपाल सिंह 16 बार नेशनल हैवीवेट चैंपियन रह चुके हैं। सतपाल सिंह ने अपनी कुश्ती की शुरुआत महान कुश्ती कोच गुरु हनुमान के छात्र के रूप में की। अपने कॅरियर में 3000 से अधिक बड़े और छोटे मैच जीते हैं और अपने दिनों में उन्होंने एक दिन में 21 कुश्ती मैच तक खेले थे।

नौशेरवां पहलवान का ख़िताब
एक टाइम था जब जामा मस्जिद पर दंगल हुआ करते थे। जामा मस्जिद पर दंगल का इतना क्रेज था के उसको देखने के लिए करीब 5000 लोगो की भीड़ जुट जाती थी। लोग हर एक कुश्ती के मैच पर अपने पहलवान की हौसला अफजाई के लिए चिलाते थे। ढोल और लोगो गूंज से दूर से ही पता चल जाता था दंगल हो रहा है।

महाबली सतपाल ने जब जामा मस्जिद पर दंगल लड़ना स्टार्ट किया तो उन्होंने लगातार उस दंगल में एक दिन में लगातार नौ कुश्तियां जीतकर नौशेरवां खिताब अपने नाम किया और आजादी के बाद नौशेरवां खिताब जीतने वाले महाबली सतपाल पहले पहलवान थे। उसके बाद उन्होंने इस दंगल में 500 कुश्तियाँ जीती।

महाबली सतपाल ने कहा, “उस समय जामा मस्जिद दंगल हुआ करता था, जिसे देखने चार-पांच हजार दर्शक इकट्ठा होते थे। उस दंगल में मैंने एक दिन में लगातार नौ कुश्तियां जीतकर नौशेरवां खिताब जीता था और आजादी के बाद नौशेरवां खिताब जीतने वाला मैं पहला व्यक्ति था। इस दंगल में मैंने 500 से ज्यादा कुश्तियां जीती थीं।”

1982 में स्वर्ण पदक जीतने के करियर बदल गया
1982 एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता भारतीय दिग्गज पहलवान महाबली सतपाल को लगता है कि उस स्वर्ण पदक ने उनके करियर और जिंदगी को बदल दिया और उनकी कुश्ती को नई ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया। लोगो ने स्वर्ण पदक आने के बाद महाबली सतपाल की रैली निकली उनका भव्य स्वागत किया गया। पूरी दिल्ली जश्न मना रही थी। घोड़े और तांगे पर मुझे घुमाते रहे। दो लाख लोगों ने बवाना में मेरा स्वागत किया। मैंने लगातार तीन पदक एशियन गेम्स में जीते थे। तेहरान में 1974 में कांस्य, 1978 बैंकॉक में रजत और फिर स्वर्ण अपने नाम किया था”।

 “मैंने स्वर्ण पदक जीत लिया था लेकिन मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि यह पदक मेरे करियर और जिंदगी दोनों को बदल देगा। इस पदक के आने के बाद मेरा करियर, मेरी जिंदगी सब कुछ बदल गई। यह पदक मेरी कुश्ती को नई ऊंचाईयों पर ले गया। यह मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। गेम्स के दौरान मेरे दायें घुटने के लिंगामेंट में चोट लग गई थी और सभी यह मान रहे थे कि सतपाल नहीं खेलेगा। मेरे गुरु हनुमान जी ने भी मना कर दिया लेकिन मैं यह मौका नहीं छोडऩा चाहता था क्योंकि हम अपने घर में खेल रहे थे और यहां सभी की उम्मीदें मुझसे जुड़ी थी। मैं टीम का कप्तान था और अन्य पहलवान हार चुके थे। अब बस सब यहीं चाह रहे थे कि एक स्वर्ण तो आना चाहिए। मुझे अंदर से लग रहा था कि मैं स्वर्ण पदक जीत सकता हूं। मैं 100 किग्रा में खेला था और 16 या 18 पहलवान यहां आए थे”

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने ‘महाबली’ नाम दिया
एशियाई चैंपियनशिप का मुकाबला देखने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी देश के पहलवानों का हौसला बढ़ाने के लिए स्टेडयम में मौजूद थी। लेकिन भारत के सभी पहलवान हार रहे थे तभी किसी ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से कहा आप सतपाल पहलवान की कुश्ती जरूर देखकर जाना।

“मेरे मुकाबले के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आईं तो एक अन्य भारतीय पहलवान हार गए थे और इंदिरा को लगा कि उनके आने से पहलवान दबाव में आ रहे हैं लेकिन किसी ने उनसे कहा कि आप सतपाल की कुश्ती जरूर देखिए। जैसे ही मेरी कुश्ती की घोषणा हुई तो मुझे इतनी खुशी थी कि पूरा देश मुझसे उम्मीद लगाए बैठा है कुश्ती के बाद जब गोल्ड मैडल जीता तो प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मुझसे कहा कि महाबली आपने देश की लाज बचाई”।

कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है
कुश्ती के लिए उनके इस समर्पण को देखते हुए ही उन्हें समय-समय पर भारत सरकार ने कई सम्मानों से नवाज़ा है। साल 1974 में उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया, तो साल 1983 में उन्हें पद्म श्री मिला। इसके अलावा कुश्ती के खेल को हर बार बेहतर से बेहतर खिलाड़ी देने के लिए उन्हें साल 2009 में द्रोणाचार्य पुरस्कार और साल 2015 में पद्म भूषण मिला।

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