Happy Birthday Special: मिलिए ‘लेडी सिंघम’ गुरशरणप्रीत कौर से, जिन्होंने जिंदगी की हर चुनौती का किया डटकर सामना

By   - 24/10/2020

वो कहते है ना जहा ‘जहां चाह वहां राह’ इस बात को सच करके दिखाया है रेसलर गुरशरणप्रीत कौर ने, 37 साल की उम्र में गुरशरण ने कुश्ती में 8 साल के बाद वापसी की और एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में 72 किलोग्राम भार वर्ग में ब्रॉन्ज़ मैडल जीतकर एक नया इतिहास रचा। आज हम आपको गुरशरण के 38वे बर्थडे पर उनके करियर से रूबरू कराने जा रहे है। कैसे वो सभी चुनौतियों को परास्त करके आगे बड़ी।

फिल्मी पर्दे की कहानी असल जिंदगी से काफी मुश्किल होती है। पर्दे पर कई मुश्किल चुनौती नजर नहीं आती हैं। आपने कंगना रानौत की फ़िल्म पंगा तो जरूर देखी होगी जिसमें एक महिला शादी के बाद कबड्डी के रिंग में कम बैक करती है। वो इसलिए कर पाती है क्योंकि उसके पति ने उसका साथ दिया। सोचिए कोई महिला रेसलिंग में अंतर्राष्ट्रीय पदक हासिल कर ले और इसमें उसके पति का साथ ना हो, साथ तो छोड़िये वो उसे पुरुषों के साथ रेसलिंग करने के लिए मारता भी हो तो शायद यकीन करना मुश्किल हो जाए। यह कहानी भारतीय महिला पहलवान गुरशरणप्रीत कौर की है।जिसने पति की पिटाई से ज्यादा अपने बुलंद हौसले और जज़्बे से देश के लिए मेडल जीतकर समाज पर तमाचा मारा और सभी लड़कियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी।

छोटी उम्र से थी घर चलाने की ज़िम्मेदारी
गुरशरण के पिता जल्दी हे गुजर गए थे जब वो बहुत छोटी थे। उनकी पास घर को चलने की ज़िम्मेदारी थी और उन्होंने जॉब के लिए रेसलिंग को चुना। मोहनपुरा बिलिंग गांव की गुरशरण पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं और गुरशरण प्रीत कौर ने 37 साल की उम्र में कुश्ती में आठ साल के बाद वापसी की और एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में 72 किलोग्राम भार वर्ग में गुरशरण प्रीत कौर ने कांस्य पदक जीतकर एक नया इतिहास लिखा।

पति रेसलिंग के खिलाफ था
पंजाब के तरनतारन की रहने वाली गुरशरण ने ने बताया, ‘2013 में मेरी शादी हो गई थी। मेरे पति मुझे खेलने नहीं देते और लड़कों के साथ कुश्ती नहीं करने देते थे। जब मैं लड़कों के साथ अभ्यास करती थी तो वह मुझे बहुत मारते थे। मुझे अपने पति से अलग होना पड़ा। मैं एक लड़की की मां बनी लेकिन मेरे पति लड़की नहीं चाहते थे। मैं मां थी और मैं उसे मरने नहीं दे सकती थी।

बीच में छोड़नी पड़ी कुश्ती
मेरे पति ने कहा कि तुम्हें मेरे और बेटी में से किसी एक को चुनना होगा तो मैंने उसी वक्त अपनी बेटी को चुन लिया। मेरी बेटी तीन साल की है। उन्होंने मेरी कुश्ती छोड़ने के लिए मजबूर किया। अगर मैं 2013 से कुश्ती करती रहती तो मेरे पास और पदक होते। जब आप मन से हार मान लोगे तो हार जाओगे लेकिन मैंने अभी हार नहीं मानी है।

जब तक है दम कुश्ती करुँगी
2018 से मैंने फिर से अभ्यास करना शुरू किया। जब मैं बहुत छोटी थी तो मेरी पिता जी की मृत्यु हो गई थी। संघर्ष तो जिंदगी का एक हिस्सा है और संघर्ष के बिना हम कोई भी कामयाबी हासिल नहीं कर सकते। संघर्ष करेंगे तो आगे बढ़ेंगे। मैंने जो पदक जीता है वो अपनी मां की मदद से जीता है। उन्होंने मेरा हमेशा से साथ दिया है। मुझे किसी भी चीज की जरूरत होती है तो वो मेरी मम्मी ही पूरा करती हैं। जब तक मेरे अंदर दम है तो मैं कुश्ती करूंगी’।

उम्र महज एक नंबर है
उन्होंने कहा, ‘मैं उम्र को नहीं मानती। उम्र सिर्फ एक नंबर है। जब तक हमारे अंदर हिम्मत है, हम कुश्ती करेंगे। जब तक हम जीत रहे हैं तो हम खेल रहे हैं चाहे हम 50 साल के भी क्यों ना हो। एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में मेरा यह पहला पदक है। 2012 में जब मैंने कुश्ती छोड़ी थी तो उसके आठ साल के बाद कुश्ती में वापसी के बाद भी मेरा पहल पदक था। दक्षिण एशियाई खेलों में मैंने स्वर्ण जीता था। अब मेरा लक्ष्य ओलंपिक के लिए आगामी ट्रायल को जीतना है।

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