मिलिए भारत के चैंपियन पहलवानों से जिनका कोई रेसलिंग बैकग्राउंड ही नहीं था

By   - 20/05/2020

भारत के ज़्यादातर पहलवानो का बैकग्राउंड पहलवान परिवारों से ताल्लुक रखता है लेकिन आज हम आपको ऐसे पहलवनो से मिलाने जा रहे है जिनका रेसलिंग से दूर दूर तक कोई नाता नहीं था और फिर भी उनकी कीमत उन्हें रेसलिंग में लेकर आई ।

योगेश्वर दत्त: योगेश्वर दत्त का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के भैंसवाल कलन गाँव में हुआ. योगेश्वर दत्त बहुत ही शिक्षित परिवार से सम्बन्ध रखते है. इनके पिता श्री राम मेहर, माता श्रीमति सुशीला देवी और इनके दादाजी पेशे से शिक्षक है. योगेश्वर अपनी माँ के ज्यादा करीब थे, उनकी माँ ना सिर्फ एक अच्छी शिक्षिका थी बल्कि एक अच्छी माँ भी थी, जोकि अपने बेटे को जीवन की अच्छी सीख देती थी. योगेश्वर अपनी जिंदगी के सारे अच्छे, बुरे और छोटे – छोटे ख़ुशी के पल अपनी माँ के साथ बांटते है. इनका परिवार चाहता था कि योगेश्वर उनके नक्शे कदम पर चलें, किन्तु उन्हें बहुत ही कम उम्र से ही कुश्ती में रूचि थी. जब वे छोटे थे तब वे अपने गाँव के एक बलराज नाम के पहलवान के कारनामे देख कर बहुत प्रेरित हुए और तभी से उन्होंने कुश्ती को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया.

भारतीय रेसलिंग के ‘जय-वीरू’, दीपक पुनिया और रवि दहिया कर रहे है एक दूसरे को मिस

पूजा ढांडा: हिसार में हरियाणा पशुपालन केंद्र के साथ एक ट्रैक्टर चालक की बेटी, वर्ल्ड मेडलिस्ट पूजा ने महाबीर स्टेडियम में जूडो खिलाड़ी के रूप में शुरुआत की लेकिन 2009 में कुश्ती में बदल गई। ।पूजा के पिता ने हमेशा से उनको खेलो में जाने के लिए प्रोत्साहित किया । वर्ष 2015 में खेल के दौरान पूजा चोटिल होने के कारण दो वर्ष तक खेलों से दूर रही है, लेकिन पूजा ने जनवरी 2017 में शानदार वापसी की। पूजा ने वर्ष 2018 में भी कॉमनवेल्थ गेम्स व सीनियर व‌र्ल्ड रेसलिग चैंपियनशिप में देश का नाम रोशन किया।

दीपक पुनिया: हरियाणा के झज्जर डिस्ट्रिक्ट में दीपक पूनिया का जन्म हुआ था और इस इलाके में रेसलिंग को लेकर एक अलग जूनुन देखने को मिलता है। दीपक के पिता सुभाष पूनिया एक डेयरी किसान हैं जो अपने बेटे को दंगल दिखाने साथ में लेकर जाया करते थे। 5 साल की उम्र में ही दीपक ने अपने गांव में मौजूद आखाडा में प्रैक्टिस करना स्टार्ट किया । सुभाष पूनिया अपने बेटे को रेसलर बनाने में लगातार उसका समर्थन करते रहे और साल 2015 से दीपक के पिता हर दिन 60 किलोमीटर की यात्रा करके अपने बेटे को दूध और फल देने जाने लगे। दीपक एक अनुशासन प्रिय खिलाड़ी थे जो उन्हें उनके पिता ने सिखाया था। पिता ने भी उनकी इस सफलता में लगातार काफी कड़ी मेहनत की है, जिससे दीपक इस मुकाम पर पहुंच सके हैं।

रवि दहिया: 22 वर्षीय पहलवान छत्रसाल स्टेडियम की देन है जहा से दो ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त निकले हैं। वह दस साल पहले अपने गांव नाहरी से यहां आए थे और तब वह केवल 12 साल के थे।। दहिया के पिता किसान है और हर सुबह 39 किमी दूर स्थित अपने गांव से बेटे के लिये दूध और फल लेकर आते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे (अपने पिता) कहा कि वे परेशान नहीं हों लेकिन वे चाहते हैं कि मैं घरवाला शुद्ध दूध लूं।’

सुनील कुमार: सुनील किसान परिवार से आते है। उनके पिता अपने बेटो शुरू से ही पहलवान बनाना चाहते थे। सुनील उस समय आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। सुनील ने पिता के सपने के लिए हां भरी तो उन्हें जींद के निडानी की स्पोर्ट्स अकादमी में भेजा गया। इसके कुछ महीनों बाद ही पिता अश्विनी की सड़क हादसे में मौत हो गई। सुनील ने पहलवानी छोड़ने का मन बना लिया। लेकिन मां अनीता देवी ने बेटे सुनील को पिता सपना पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया। मां ने उसे वापस अखाड़े में भेज दिया। वहां जाने के बाद बड़ी बहन रेनू, बड़े भाई माेनू और मां अनीता ने हर संभव सहारा देकर में खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। अब सुनील ने देश काे 27 साल बाद ग्रीको रोमन कैटेगरी, एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर उसका गौरव लौटाया है। सुनील ने बताया – “घर जा कर मेने माँ को कहा मेने पिता का सपना पूरा कर दिया

गुरशरण प्रीत कौर: गुरशरण के पिता जल्दी हे गुजर गए थे जब वो बहुत छोटी थे। उनकी पास घर को चलने की जिम्मेदारी थी और उन्होंने जॉब के लिए रेसलिंग को चुना। मोहनपुरा बिलिंग गांव की गुरशरण पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं और गुरशरण प्रीत कौर ने 37 साल की उम्र में कुश्ती में आठ साल के बाद वापसी की और एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में 72 किलोग्राम भार वर्ग में गुरशरण प्रीत कौर ने कांस्य पदक जीतकर एक नया इतिहास लिखा।

नवजोत कौर: पंजाब के अमृतसर के पास के तरन-तारन में एक किसान परिवार की बेटी है। पिता सुखचैन सिद्धू ने शुरू से बेटियों को रेसलर बनने के लिए मोटिवेट किया है। नवजोत के पापा PT उषा के बहुत बड़े फैन है पहले उन्होंने अपनी बड़ी बेटी से रेसलिंग कराई लेकिन उसको इंजरी हो गई थी तो फिर नवजोत को मौका मिला रेसलिंग में कुछ करने का। 2018 में नवजोत ने अपने पापा और बहन का सपन पूरा किया। 2018 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। वह ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला रेसलर बनी ।

Wrestling (Kushti) fans can catch Live Streaming, Highlights, News, Videos, Photos, Results and Rankings on WrestlingTV

Leave a Comment