सुशील कुमार का गोल्डन ईयर – आज के दिन जीता था वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल

By   - 12/09/2020

डबल ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार के कई कारनामों के बारे में अपने सुना और देखा होगा कैसे उन्होंने भारतीय रेसलिंग को फर्श से अर्श तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसा ही एक कारनामा उन्होंने आज के दिन साल 2010 में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर किया था और ऐसा करने वाले वो पहले भारतीय पहलवान बने। सुशील कुमार ने फाइनल मुकाबले में रूस के गोगायेव ऐलन को 3-1 से हराकर गोल्ड मेडल हासिल किया था।

सुशील ने इस शानदार पल को याद करते हुए अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया और लिखा ” 12 सितंबर, 2020 को..मैंने विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण जीता..एक दशक हो गया है। चेरिश करने के लिए सबसे अच्छी यादों में से एक है”।

सुशील ने साल 2010 को अपना सबसे बेहतरीन साल बताया जहा उन्होंने कई गोल्ड मेडल हासिल किए और कहा “2010 सर्वश्रेष्ठ वर्ष था, जहां भी मैं गया, मैंने स्वर्ण पदक जीता। राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई चैंपियनशिप, विश्व चैंपियनशिप। मैंने रूस में एक रूसी पहलवान को हराया और विश्व चैंपियन बन गया”।

फ़ाइनल से पहले सुशील ने अज़रबैजान के हसनोव जबराइल, ग्रीस, जर्मनी और मंगोलियाको के पहलवानो को हराया था। चैंपियनशिप के फ़ाइनल तक पहुँचने वाले सुशील एकमात्र भारतीय बचे थे। भारत के बाक़ी सभी पहलवान इस चैंपियनशिप के फ़ाइनल से पहले ही बाहर हो गए थे।

सुशील कुमार के स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनके कोच, गुरू सतपाल ने उन्हें बधाई दी थी और कहा कि “ये भारतीय कुश्ती का ही नहीं बल्कि विश्व कुश्ती का इतिहास है. ये लड़का मेरे पास 12 साल की उम्र में आया था। ये सुपर है.”

टोक्यो ओलंपिक पर है नज़र – ‘आखिरी ओलंपिक होगा’
कोरोनोवायरस महामारी के कारण ओलंपिक एक साल आगे बढ़ने से दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार को एक और अवसर दिया। 2016 में मौका गँवाने के बाद, वह अपने तीसरे ओलंपिक पदक पर नजर गड़ाए हुए हैं, वह अब 2021 ओलंपिक के लिए अपनी तैयारियों में लगे हुए हैं। लेकिन यह उनका आखिरी ओलंपिक होगा।

उनके कोच सतपाल सिंह ने खुलासा किया है कि यह सुशील का आखिरी ओलंपिक होगा। “अगर सुशील इसे बनाता है, तो टोक्यो उसका आखिरी ओलंपिक होगा”

“एक एथलीट के जीवन में एक वर्ष बहुत लंबा होता है, इसलिए टोक्यो खेलों में एक साल की देरी से कुछ फर्क पड़ेगा। लेकिन सुशील बहुत अनुशासित है। अब भी वह अपनी ताकत और सहनशीलता बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। वह जानता है कि टोक्यो उसका आखिरी मौका है, और भारत के लिए स्वर्ण जीतने की उसकी दिली इच्छा है” कोच सतपाल ।

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