Wrestling News: मिलिए भारत के पहले अर्जुन अवार्डी और पहले वर्ल्ड मेडलिस्ट पहलवान से

By   - 27/06/2020

Wrestling News: महान पहलवान उदयचंद का जन्म हरियाणा के हिसार के पास एक छोटे से गॉव जाण्डली मे हुआ था । बचपन से ही उदयचंद कुश्ती के शौकीन थे । अपने भाई हरिराम के साथ उदय चंद प्रैक्टिस करते थे । भारतीय सेना मे भर्ती होने के बाद उदय चंद के सपने आसमान छूने लगे थे । 1958 से 1970 तक लगातार 12 वर्षो तक राष्ट्रीय चैंपियन रहे, जो आज भी एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।

आजाद भारत के पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट
पहलवान उदयचंद के कैरियर की शुरुआत ही उस समय हुई थी जिस समय खेलो की हालत बहुत खराब थी। जीतने पर भी कोई नही पहुँचता था । देश मे खेल संघों के अध्यक्ष उद्योगपति होते थे । लेकिन खिलाड़ी एक-एक पैसे के मोहताज हुआ करते थे । पहलवान उदयचन्द कुश्ती जगत का वो कोहिनूर है जिन्होंने योकोहामा 1961 में हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रोंज मैडल जीता था। पहलवान उदय चंद आजाद भारत के पहले व्यक्तिगत वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के पदक विजेता है। पहलवान उदय चंद जी अपने भाई हरिराम के साथ विश्व चैंपियनशिप मे हिस्सा लेने साथ गये थे भारत के इतिहास मे ऐसा पहली बार था कि एक मॉ के दो बेटे विश्व चैंपियनशिप मे गये हो।

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पहलवान उदय ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के अपने अनुभव के बारे में कहा, “उस समय बहुत खुशी हुई थी। भारत मां के दो सपूत पहली बार विश्व चैंपियनशिप में गए थे। बड़े भाई का नाम था हरिराम। हम दोनों भाई गए थे और यह मेरे लिए बेहद खास था।”

 

तीन बार ओलंपिक का हिस्सा बने
उदय चन्द जी ने तीन ओलिम्पक मे भाग लिया रोम 1960 , टोक्यो 1964 , मैक्सिको सिटी 1968 और यहाँ वो 6 पोजीशन पर रहे। उदय चन्द जी ने एशियाई खेलों में दो बार भाग लिया 1962 के एशियाई खेलों जकार्ता में 70 किलो ग्रेको रोमन में दो रजत पदक जीते और 1966 एशियाई खेलों बैंकाक में 70 किलो फ्रीस्टाइल में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा उन्होंने चार अलग-अलग विश्व कुश्ती चैंपियनशिप यानी योकोहामा 1961, मैनचेस्टर 1965, दिल्ली 1967 और एडमोंटन 1970 में भाग लिया। उन्होंने स्कॉटलैंड के एडिनबर्गए 1970 में ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक के साथ अपने शानदार कैरियर को चार चॉद लगा दिये।

1970 में पूरा हुआ गोल्ड मैडल का सपना
पहलवान उदय का गोल्ड मैडल का सपना 1970 में तब पूरा हुआ, जब एडिनबर्ग में हुए राष्ट्रमंडल खेलों की लाइटवेट कुश्ती स्पर्धा में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और देश का नाम रौशन किया। इस से पहले उन्होंने जकार्ता में 1962 में हुए एशियाई खेलों के ग्रीको रोमन व फ्री स्टाइल दोनों स्पर्धाओं में उन्होंने रजत पदक जीता और भारतीय टीम का नेतृत्व किया। इसके बाद बैंकॉक में 1966 में हुए एशियाई खेलों की फ्रीस्टाइल कुश्ती में उन्होंने कांस्य पदक जीता।

कुश्ती के पहले अर्जुन अवार्डी
उदयचंद की उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1961 में कुश्ती में देश का पहला अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया। अर्जुन पुरस्कार की स्थापना 1961 में ही हुई थी।

तीन बार मास्टर चंदगी राम से हुई कुश्ती
पहलवान उदयचन्द तीन बार मास्टर चंदगी राम के आमने सामने थे लेकिन कुश्ती का कभी कोई परिणाम नही निकल सका और कुश्ती बराबरी पर रही।

धुम्रपान उदयचन्द की कमज़ोरी
श्री उदयचंद जी बीडी हुक्का पिया करते थे कभी कभी तम्बाकू का भी सेवन करते थे । श्री उदयचंद खुद मानते है की ये मेरी सबसे बडी कमज़ोरी थी जिसका मुझे तमाम उम्र मलाल रहेगा यदि मै तम्बाकू, बीडी, सिगरेट का सेवन न करता तो करीब 15 मेडल और अधिक जीत सकता था और विश्व चैम्पियन होता ।

सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने 1970 से 1995 तक हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बतौर प्रशिक्षक अपनी सेवाएं दीं, और अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के कई पहलवान देश के लिए तैयार किए। उदयचंद ने कहा, “मैं अपने शिष्यों को यही कहता हूं कि तंबाकू को हाथ न लगाओ, बाकी सब मैं संभाल लूंगा। मेरे शिष्य एक से बढ़कर एक हैं।”

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