जानिए क्या हुआ था जब ताऊजी ने विनेश फोगाट की कड़क वाली ट्रेनिंग शुरू कराई

By   - 14/07/2020

आज विनेश दुनिया टॉप रेस्टलेर्स में से एक हैं। साल 2020 की शुरुआत उन्होंने रोम में गोल्ड मेडल जीतकर की थी। 2018 के बाद से, 26 वर्षीय अपने ग्रुप में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वालों में से एक रही है। उन्होंने दो वर्षों के दौरान 11 प्रतियोगिताओं में से 11 पदक जीते हैं। इसके अलावा, वह अकेली महिला पहलवान हैं, जिन्होंने 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप नूर-सुल्तान में कांस्य पदक जीतने के बाद भारत के लिए टोक्यो का बर्थ बुक किया है। उनके शानदार प्रदर्शन के कारण रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने दूसरी बार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया है ।

आज विनेश ओलंपिक मैडल जीतने की प्रबल दावेदार है।लेकिन चैंपियन रेसलर का सफर बड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा है।आइए हम आपको विनेश के उस वक़्त से रूबरू कराते है जब वो अपने ताऊजी (महाबीर फोगाट) से पहलवानी के गुर सिख रही थी। पहले तो मज़े मज़े में खेलना स्टार्ट किया लेकिन जब ताऊजी ने कड़क वाली ट्रेनिंग शुरू की तो फिर विनेश का क्या हाल हुआ?

वो बताती हैं, “जब बच्चे थे तो शुरू-शुरू में तो एक-दो महीने बहुत अच्छा लगा जब ताऊजी कुश्ती के लिए ले जाते। खेलना किस बच्चे को अच्छा नहीं लगता। धीरे-धीरे उन्हें लगना लगा कि इन लड़कियों में वाकई पहलवान बनने का दम है। उसके बाद हमारी कड़क वाली ट्रेनिंग शुरू हो गई। हमें सुबह साढ़े तीन बजे उठना पड़ता, ट्रेनिंग कितने घंटे चलेगी ये तय नहीं होता था। अगर आज के बच्चों को ऐसी कड़ी ट्रेनिंग करनी पड़े तो वो पहले ही दिन भाग जाएँ” बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया।

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विनेश बताती है अगर ट्रेनिंग में कोई गलती होती थी तो ट्रेनिंग का टाइम और बढ़ जाता था और मार अलग पड़ती थी। उस टाइम ज़िंदगी का एक ही मतलब रह गया था कुश्ती करो, खाओ और चुपचाप सो जाओ।

“अगर कोई ग़लती हुई तो ट्रेनिंग और खिंच जाती और जो ज़बरदस्त वाली मार पड़ती वो अलग। इसके बाद हम स्कूल जाते, क्लास में तो हम सोते ही थे बस। तब ज़िंदगी का मतलब था: कुश्ती करो, खाओ और चुपचाप सो जाओ बस। बाल लंबे करने तक की इजाज़त नहीं थी क्योंकि ताऊजी को लगता था कि इससे ध्यान भटकेगा, लोग उन्हें काफ़ी कुछ बोलते थे लेकिन ताऊजी की नज़र सिर्फ़ ओलंपिक मेडल पर थी.”

उस वक़्त गाँव में नन्हीं विनेश को पता तक नहीं था कि आख़िर ओलंपिक होता क्या है?

वो बताती हैं, “हम ट्रेनिंग से इतने तंग आ चुके थे कि हमें लगता था: भाई कौन है ये? ओलंपिक कहाँ मिलता है? कोई इनको लाकर दे दो तो हमारा पीछा छूटे। सिर्फ़ ताऊजी को ही पता था कि वो कितना आगे की सोच रहे थे.”

आज विनेश की मेहनत और ताऊजी की कड़क ट्रेनिंग ने विनेश को वर्ल्ड की टॉप रेस्टलेर्स में शुमार कर दिया है। विनेश का फ़िलहाल एक ही लक्ष्य है- टोक्यो 2021 में 2016 के अधूरे सपने को पूरा करना। जिसके लिए वो दिन-रात मेहनत कर रही है।

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