जानिये कैसा रहा विनेश फोगट का 11 साल का अंतरराष्ट्रीय करियर

By   - 21/05/2020

लॉकडाउन के चलते सभी लोग इन दिनों घर में रह कर नियमों का पालन कर रहे है। ऐसे में घर बैठे लोगो को अपनी पुरानी यादें ताज़ा करने का अच्छा मौका मिल गया है । जिसका फ़ायदा इन दिनों सभी लोग उठा रहे है। इसी बीच वर्ल्ड मेडलिस्ट विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साल 2009 से अभी तक जितने भी मेडल्स उन्होंने जीते, उनके साथ अपनी एक फोटो शेयर की। साल 2009 में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता और एक पहलवान के रूप में इस अद्भुत यात्रा की शुरुआत हुई।

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“मैंने 2009 में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता और एक पहलवान के रूप में इस अद्भुत यात्रा की शुरुआत की! 11 साल हो चुके है , और अभी भी इस सवारी का आनंद ले रही हूँ। इस टैली में कई और पदक जोड़ने के लिए उत्साहित हूँ। प्यार, हँसी, दर्द, निराशा और आशा के इन सभी वर्षों के लिए बहुत आभारी हूँ ” विनेश ने कहा।

कुश्ती का करियर

विनेश के कुश्ती करियर की शुरुआत साल 2009 से हुई। इसी साल इंदौर के अर्जुन अवॉर्डी कृपाशंकर बिश्नोई के देखरेख में ट्रेनिंग ले कर उन्होंने अपना पहला मैडल सब जूनियर एशियाई चैंपियनशिप में जीता जो पुणे इंडिया में हुई थी। साल 2013 में विनेश ने दिल्ली में आयोजित हुए दिल्ली एशियन गेम्स में 51 किग्रा कैटेगरी में कांस्य पदक जीता इसी साल उन्होंने जोहानसबर्ग में आयोजित हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी रजक पदक जीता। इसके बाद विनेश ने यह सिलसिला कभी रुकने नहीं दिया।

2014 में ग्लास्गो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में मैंने 48 किलोग्राम भार वर्ग में सोना अपने नाम किया तो 2014 में इंचियोन एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता। 2015 में दोहा में एशियन कुश्ती में रजत और 2016 में बैंकॉक में 53 किलोग्राम में कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विनेश ने अब तक करीब 40 से भी ज्यादा पदकों को अपने नाम कर लिया है। विनेश फोगाट ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार से बहुत ज्यादा ही प्रभावित हैं। इसके अलावा वह अपनी बहनों को भी अपना आदर्श मानती हैं। विनेश का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितने भी पहलवान पहुंचे हैं, वह सुशील कुमार के कारण ही पहुंच पाए हैं। क्योंकि हर किसी ने उन्हें अपना आदर्श माना है

ओलिंपिक की तैयारी

विनेश इन दिनों अपने घर खरखौदा गाँव , हरियाणा में है और एक स्कूल में अपनी बहन प्रियंका के साथ प्रशिक्षण ले रही है। वह स्थिति सामान्य होने और ओलंपिक के सपने को पूरा करने के लिए मैट पर लौटने का इंतज़ार कर रही है ।

“हर दिन मैंने खुद को बताया कि चीजें बेहतर हो जाएंगी लेकिन कहीं न कहीं मुझे पता था कि ये सभी के लिए चुनौती पूर्ण समय है। मैं इस निर्णय का सम्मान और सराहना करती हूं। मुझे कुछ प्रशिक्षण का सौभाग्य मिला है लेकिन कोरोनावायरस महामारी के कारण बहुत से ऐसे खिलाड़ी है प्रशिक्षित भी नहीं हो पा रहे हैं, ” विनेश फोगाट ने रेसलिंगटीवी को बताया।

हंगेरियन कोच ने इस समय में फोगट की प्रेरणा को उच्च रखना सुनिश्चित किया है । भारतीय पहलवान पिछले कुछ वर्षों से टोक्यो ओलंपिक के लिए सपने देख रही है । लेकिन COVID-19 के प्रकोप ने उसकी योजनाओं को बैक-बर्नर पर डाल दी है । अकोस का कहना है कि हर समय प्रेरित होना आसान नहीं है, लेकिन केवल अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत रखने वालों की ही जीत होगी।

“यह हर किसी के लिए कठिन है। एथलीट, कोच, सहयोगी स्टाफ, हर कोई इसमें एक साथ है। वरिष्ठ पहलवानों के लिए स्थिति अधिक गंभीर है लेकिन विनेश अभी भी युवा हैं। हालांकि, प्रेरणा को बनाए रखना मुश्किल है। उसे इसके सकारात्मक पक्ष को देखने की जरूरत है। ओलम्पिक खेलों को स्थगित करने से उसे तैयारी करने का एक वर्ष और मिल गया”।

“हर हफ्ते मैं उसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भेजता हूँ। यह आमतौर पर सरल अभ्यास है जो वह घर पर कर सकती है। हालांकि वे सरल हैं लेकिन वे आसान नहीं हैं। अपने स्तर को ऊंचा रखना वर्तमान में हमारा लक्ष्य है”
अकोस ।

आपको बता दे विनेश इंडिया के लिए 53 kg में कोटा प्राप्त कर चुकी है और ओलिंपिक पदक जीतने की बड़ी उम्मीदवार है । ओलिंपिक एक साल स्थगित होने से उनको दुख तो हुआ लेकिन उनके इरादे उतने ही मजबूत है जितने पहले थे।

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