एक सपना जो मर गया था कोरोनावायरस ने दिया कोल्हापुर की रेसलर को ओलंपिक में खेलने का नया जीवनदान

By   - 26/06/2020

रेशमा माने एक भारतीय महिला पहलवान हैं, जो महाराष्ट्र के कोल्हापुर के गांव वेदंगे से हैं। माने फ्री स्टाइल रेसलिंग के 62 किलोग्राम वर्ग में खेलती है। माने अपने छोटे से रेसलिंग करियर में कई बड़े मुकाम हासिल कर चुकी और करने वाली है। अपनी इंजरी से परेशान चल रही 22 वर्षीय रेशमा ने सोच लिया था वो इस साल होने वाले ओलंपिक का हिस्सा नहीं बन सकती लेकिन कोरोनावायरस के कारण ओलंपिक एक साल आगे बढ़ने से रेशमा की उमीदे एक बार फिर से जगी है। उनको टाइम मिलने से, अब वो अपनी इंजरी से कमबैक कर चुकी है और आने वाली नेशनल ट्रायल्स के लिए अपने गांव के अखाड़े में अपने भाई और कोच के साथ ट्रेनिंग कर रही है।

“मेने तो बिलकुल आस छोड़ दी थी के में इस साल ओलंपिक खेल पाऊंगी। मुझे नी लिगमेंट टेअर इंजुरी हुए थी जिसके लिए मुझे सर्जरी करनी पड़ी कोरोनावायरस की वजह से ओलंपिक एक साल आगे बढ़ गया जिससे मुझे रिकवरी का टाइम मिला, अब में बिलकुल ठीक हूँ और जब भी अब नेशनल ट्रायल्स होंगे मैं 62 किलो ग्राम वर्ग में खेलने के लिए बिलकुल तैयार हूँ” रेशमा ने रेसलिंगटीवी को बताया।

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62 किलो ग्राम वर्ग में कई बड़े नाम और यंग, टैलेंटेड खिलाड़ी है जिनके खिलाफ रेशमा को खेलना पड़ेगा। ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मालिक, सोनम जो साक्षी को दो बार नेशनल ट्रायल्स में हरा चुकी है वो इस वेट की नंबर वन रेसलर है। उसके बाद नवजोत कौर जो एक एक्सपेरिएंस्ड खिलाड़ी है। रेशमा का मानना है उनके वेट में अच्छे खिलाड़ी है लेकिन वो इस चुनौती के लिए खुद को तैयार कर रही है और अपनी कमियों पर काम कर रही है।

“मेरे वेट में साक्षी मालिक, जो ओलंपिक मेडलिस्ट है और सोनम जिसने साक्षी को दो बार नेशनल ट्रायल्स में हराया है दोनों ही बहुत अच्छे प्लेयर्स है लेकिन मैं भी अच्छी तैयारी कर रही हूँ जो मेरी कमिया है उनपर काम कर रही हूँ। टफ कम्पटीशन होना बहुत जरूरी है यह आपको आगे के लिए स्ट्रांग बनाता है और आप जब यहाँ अच्छा करते है तो बहार भी मैडल लाने के चान्सेस बढ़ जाते है” रेशमा ने कहा।

महाराष्ट्र रेसलर लेग डिफेंस पर काम कर रही है और उनको लगता है वो उनकी एक कमज़ोरी है, अगर वो अपने लेग डिफेंस को ठीक कर लेती है तो जीत का फ़ासला और काम हो जायेगा। “मैं लेग डिफेंस पर काम कर रही हूँ जो मुझे लगता है मेरी एक कमज़ोरी है अगर यह ठीक हो जायेगा तो जीतने के चान्सेस और बढ़ जायेंगे” रेशमा।

नेशनल चैम्प के पापा रेशमा के लिए रेसलिंग में एक बड़ा सपोर्ट है जो उनको हमेशा मोटीवेट करते है चाहे वो हारे या जीते। रेशमा अपने पापा और देश के लिए ओलंपिक मैडल जीतना चाहती है।

“मेरे पापा का सपना है के मैं ओलंपिक मैडल जीतू मैं उनके लिए और देश के लिए ओलंपिक मैडल जीतना चाहती हूँ जिसके लिए मैं हर दिन मेहनत करती हूँ” रेशमा ने कहा ।

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