एशियाई ओलंपिक रेसलिंग क्वॉलीफायर्स: क्या 19 साल की अंशु और सोनम मलिक रचेंगी इतिहास?

By   - 10/04/2021

एशियाई ओलंपिक रेसलिंग क्वॉलीफायर्स: क्या 19 साल की अंशु और सोनम मलिक रचेंगी इतिहास?- एशियाई ओलंपिक रेसलिंग क्वॉलीफायर्स के दूसरे दिन भारत की पांच सदस्यीय महिला टीम काजिकस्तान में अपना पूरा दमखम लगाएगी. विनेश फोगाट ने 53 किग्रा भार वर्ग में वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर पहले ही कोटा हासिल कर लिया है. जिसके बाद अब भारत ने काजिकस्तान में अपनी पांच सदस्यीय महिला टीम भेजी है. वहीं बचे हुए भार वर्ग 50 किग्रा, 57 किग्रा, 62 किग्रा और 76 किग्रा है. इस युवा स्क्वाड में टोक्यो ओलंपिक का कोटा हासिल करने के लिए अंशु और सोनम मलिक पसंदीदा पहलवान हैं.

महिला (50 किग्रा) – सीमा बिसला

सीमा बिसला 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ओलंपिक में जगह बनाने से सिर्फ एक जीत दूर थी लेकिन रूस की कांस्य पदक विजेता इकतेरिना पोलेश्यूक से हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि उसके पास अलमाटी में भी टोक्यो के लिए जगह बनाने का पूरा मौका है. जापान की यूई सुसाकी गोल्ड जीतने की सबसे पसंदीदा है. सीमा को क्वालीफाई करने के लिए दूसरा स्थान प्राप्त करना होगा.

महिला (57किग्रा)- अंशु मलिक

19 साल की अंशु ने 57 किग्रा भार वर्ग में साल 2020 से काफी प्रभावित किया है. इस युवा पहलवान ने अपने तीन सीनियर प्रतियोगिताएं में तीन पदक जीते हैं और इस बार भी उनसे ऐसी ही कुछ उम्मीदें होंगी. वहीं शीर्ष स्तर के पहलवान (हेलन मारोयूलिस (यूएसए), ओडूनायो एडयूरोए ( एनजीआर), रीसाको कावाई (जेपीएन) और इरयना कुराचिकना (बीएलआर) पहले ही क्वालीफाई कर चुकी हैं ऐसे में आंशु के लिए फाइनल में पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. हालांकि उनकी दोस्त सोनम के लिए रास्ता आसान न हो.

महिला (62किग्रा)- सोनम मलिक

62 किग्रा में सोनम ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी दबदबा बनाकर रखा है. उन्होंने 2016 ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक को कई बार मात दी है लेकिन अभी भी सोनम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना बाकी है. सोनम के लिए इस वर्ग में कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ सकता है. अंतिम दो जगहों के लिए सोनम सहित नौ पहलवान मुकाबले के लिए उतरेंगे. सोनम के लिए सबसे बड़ी चुनौती दो बार की एशियाई मेडलिस्ट नबीरा इसेनबाएवा और आयालिम केसीमोवा रहेंगी.

महिला (68किग्रा)- निशा दहिया

निशा दहिया पर भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी. इंटरनेशनल स्तर पर डोपिंग के चार साल बाद वापसी कर रही निशा मिलने वाले हर मौके को पूरी तरह से भुनाना चाहेंगी. मजे की बात ये है कि दहिया की तीन कड़ी प्रतिद्वंदी उनके रास्ते से हट गई हैं. ( जापान और मंगोलिया पहले ही क्वालीफाई कर चुकी हैं और नार्थ कोरिया अब इस इवेंट से बाहर हो चुका है इसके बावजूद उनकी ओलंपिक में जगह बनाने की राह आसान नहीं होने वाली है. हालांकि उसे अपने ग्रुप में आगे बढ़ जाना चाहिए. उसका मुकाबला या तो चीन की फेंग होउ, काजिकस्तान की झमिला बाकबरजेनेवा या काजिकस्तान की मेरिम झूमनअजारावो से सेमीफाइनल में होगा. कोई भी आसान प्रतिद्वंदी नहीं है. रोम रैंकिंग सीरीज में मार्च में गोल्ड जीतने के बाद बाकबरजेनेवा शानदार फॉर्म में है.

महिला (76किग्रा)- पूजा सिहाग

भारत की पूजा सिहाग का ओलंपिक में क्वालीफाई करने का सबसे सुनहरा मौका है. उनकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी काजिकस्तान की आईपेरी काईजाई और दक्षिण कोरिया की सीयो-येआन जीआंग हैं. दोनों एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडलिस्ट हैं.

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