’70 मिनट’ 3 मैच और भारत को मिला ओलंपिक मैडल

By   - 04/07/2020

आप सभी ने शाहरुख खान की मूवी चक दे इंडिया तो देखीं ही होगी। जिसमे महिला इंडिया हॉकी टीम के कोच की भूमिका निभाते हुए कबीर सिंह (शाहरुख़ खान) अपनी टीम को मैच खेलने से पहले एक मोटिवेशनल स्पीच देते है। उसमे वो अपने टीम को कहते है की “70 मिनट , 70 मिनट है तुम्हारे पास शायद तुम्हारे जिंदगी के सबसे खास 70 मिनट आज तुम अच्छा खेलो या बुरा , यह 70 मिनट तुम्हे जिंदगी भर याद रहेंगे तो कैसे खेलना है आज में तुम्हे नहीं बताऊंगा बस इतना कहूँगा , की जाओ और यह सत्तर मिनट जी भर के खेल लो”। फिल्म का ये डायलॉग काफी फेमस हुआ था। लेकिन असल ज़िन्दगी में यह किस्सा डबल ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार के साथ हो चूका है उनके पास भी 70 मिनट थे और उन्होंने लगातार तीन मुक़ाबले जीतकर देश को बीजिंग में भारत को दूसरा ओलंपिक मैडल दियाला था। उनसे पहले केडी जाधव ने 1952 के खेलों में कांस्‍य पदक जीता था।

बीजिंग ओलंपिक खेलों में फ्रीस्‍टाइल के 66 किलो भारवर्ग में सुशील पहले ही राउंड में एंड्री स्‍टाडनिक से हार गए थे। इसके चलते उनकी उम्‍मीदें रेपचाज राउंड पर आ गई थी। स्‍टाडनिक फाइनल में पहुंच गए थे ऐसे में सुशील को ब्रॉन्‍ज मेडल जीतने का एक मौका मिला। उन्‍होंने पहले डग स्‍वाब और फिर दूसरे राउंड में अल्‍बर्ट बाटीरोव को मात दी और कांस्‍य पदक के मुकाबले में उन्‍होंने 20 अगस्‍त 2008 को लियोनिड स्पिरिडोनोव को 3 -1 से हराया और इतिहास रचा था।

ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार ने 70 मिनट की अवधि में लगातार 3 मुकाबले खेले थे। ब्रॉन्‍ज मेडल जीतने के बाद उन्‍होंने बताया कि उनके पास कोई मसाजर नहीं था। ऐसे में टीम मैनेजर और एशियन गेम्‍स के पूर्व मेडलिस्‍ट करतार सिंह को उनकी मसाज करनी पड़ी।

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चार साल बाद 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने सिल्वर मैडल जीतकर एक और इतिहास रच दिया वो दो ओलंपिक मैडल जीतने वाले पहले भारतीय बने। सुशील कुमार को 2012 के लंदन ओलंपिक के फाइनल मुक़ाबले में जापान के पहलवान तासुहीरो से भिड़ना था। हालांकि मैच से पहले सुशील कुमार की तबियत खराब हो गई। उन्होंने उल्टियां की थी और उनके शरीर में पानी की कमी हो गई। इसके बावजूद सुशील कुमार अखाड़े में उतरे लेकिन साफ तौर पर थकान उनके शरीर पर हावी दिखाई दी। जापान के पहलवान तासुहीरो ने एकतरफ़ा मुकाबले में सुशील कुमार को 4-1 से हराकर गोल्ड अपने नाम कर लिया। सुशील कुमार फाइनल जरूर हारे लेकिन उन्होंने सिल्वर मेडल जीत करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों के नए पंख दिए।

2016 में मौका गँवाने के बाद, सुशील अपने तीसरे ओलंपिक पदक पर नजर गड़ाए हुए हैं, अब दिग्गज पहलवान 2021ओलिंपिक के लिए अपनी तैयारियों में लगे हुए हैं। लेकिन यह उनका आखिरी ओलंपिक होगा। पहलवान 37 साल के हो चुके है और समर गेम्स के आने तक वह 38 साल के हो जायेंगे । उनके कोच सतपाल सिंह ने खुलासा किया है कि यह सुशील का आखिरी ओलंपिक होगा। “अगर सुशील यहाँ खेलता है, तो टोक्यो उसका आखिरी ओलंपिक होगा”

“एक एथलीट के जीवन में एक वर्ष बहुत लंबा होता है, इसलिए टोक्यो खेलों में एक साल की देरी से कुछ फर्क पड़ेगा। लेकिन सुशील बहुत अनुशासित है। अब भी वह अपनी ताकत और सहनशीलता बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। वह जानता है कि टोक्यो उसका आखिरी मौका है, और भारत के लिए स्वर्ण जीतने की उसकी दिली इच्छा है” कोच सतपाल ।

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