द्रोणाचार्य गुरु सतपाल के करियर का रिकॉर्ड सबसे लम्बा मुक़ाबला, जो 40 मिनट तक चला

By   - 22/05/2020

कुश्ती दुनिया का सबसे पुराना खेल है साल 1896 में जब ओलंपिक की स्थापना हुई थी, तब कुश्ती को नौ खेलों में शामिल किया गया था। माना जाता है कि कुश्ती की शुरूआत भारत में हुई। पिछले एक दशक में भारतीय पहलवानों ने कुश्ती में अच्छा प्रदर्शन किया है और इसमें खिलाड़ियों के साथ साथ कोच की भी कड़ी मेहनत होती है। भारत में प्राचीन काल से गुरुओं की शिक्षा का एक अलग ही महत्व रहा है।

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ऐसे ही एक द्रोणाचार्य गुरु हैं सतपाल सिंह, जिन्होंने ओलंपिक मेडल जीतने और विश्व चैंपियन बनने में भारत की मदद की। कुश्ती कोच एवं पूर्व पहलवान सतपाल सिंह के हम आज ऐसे मुकाबले के बारे में बताने जा रहे है जो उनके पूरे करियर में रिकॉर्ड सबसे देर तक चलने वाला मुक़ाबला था।

सबसे लम्बा कुश्ती मैच

कोच सतपाल सिंह ने 1981 में बेलगाम में अपना सबसे लंबा मैच खेला। यह मुक़ाबला 40 मिनट तक चला।

अपने सबसे लंबे बाउट को याद करते हुए कोच सतपाल कहते हैं, “कुश्ती तब कुश्ती से बहुत अलग थी। यह अब बहुत तेज है। यह मैच 40 मिनट के लिए चला। मेने यह मुक़ाबला (रुस्तम-ए-हिंद) दादू चौगुले के खिलाफ खेला था। मुझे उसे नीचे लाने में बहुत समय लगा। ”

उनका सबसे छोटा मैच , पाकिस्तान के एक पहलवान के खिलाफ वाराणसी में खेला गया, यह सिर्फ पांच सेकंड तक चला।

रेसलिंग की शुरुआत

सतपाल सिंह का कहना है कि एक दिन कुछ लड़कों ने स्कूल में उनके साथ झगड़ा और मार-पीट की इस पर उनकी मां ने सतपाल को पिता के साथ अखाड़े भेजना शुरू कर दिया। सतपाल के लिए यह पहला रेसलिंग स्कूल था जो गाँव के एक तालाब के पास था। एक साल बाद जैसे-जैसे वक्त बीतता चला गया, उनका आत्मविश्वास बढ़ता चला गया और दिल्ली में गुरु हनुमान अखाड़े में वे शामिल हो गए।

करियर की उपलब्धियाँ

सतपाल सिंह 16 बार नेशनल हैवीवेट चैंपियन रह चुके हैं। सतपाल सिंह ने अपनी कुश्ती की शुरुआत महान कुश्ती कोच गुरु हनुमान के छात्र के रूप में की। अपने कॅरियर में 3000 से अधिक बड़े और छोटे मैच जीते हैं और अपने दिनों में उन्होंने एक दिन में 21 कुश्ती मैच तक खेले थे। तेहरान में एशियन गेम्स वर्ष 1974 में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

उन्होंने राष्ट्रमंडल खेल वर्ष 1974, 1978 और 1982 में सिल्वर मेडल जीते। बैंकॉक में एशियन गेम्स 1978 में सिल्वर मेडल जीता। दिल्ली में एशियाई खेलों साल 1982 में गोल्ड मेडल जीता। वर्ष 1979 और 1981 के राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीते। सतपाल सिंह ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के विभिन्न संस्करणों में भी भाग लिया। उनके कार्यालय के बाहर लगी नेम प्लेट में “महाबली” सतपाल सिंह लिखा हुआ है।

अवार्ड्स

1974 – अर्जुन पुरस्कार (कुश्ती)

1983 – पद्मश्री पुरस्कार

2009 – द्रोणाचार्य पुरस्कार

2015 – पद्म-भूषण पुरस्कार

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कुश्ती से रिटायर होने के बाद सतपाल सिंह ने उत्तरी दिल्ली में छत्रसाल अखाड़ा का निर्माण किया। अखाड़े में सुशील कुमार, अमित कुमार और योगेश्वर दत्त जैसे पहलवानों को ट्रेन किया गया। अब भी सतपाल सिंह प्रतिदिन छत्रसाल अखाड़ा पहुंचते हैं और उभरते हुए पहलवानों को मोटीवेट करते है

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