विश्व चैंपियन पहलवान, दिहाड़ी मजदूर की बेटी तीन टाइम के खाने की लिए तरसी

By   - 21/05/2020

कोमल, 15 साल की है और वर्तमान कैडेट विश्व कुश्ती चैंपियन है और एक साधारण परिवार से तालुक रखती है। उसके पिता, सतीश कुमार एक प्रवासी श्रमिक हैं और अपने परिवार के लिए रोज़ी-रोटी कमाने के लिए कोई भी काम कर लेते हैं। Covid19 ने परिवार को कड़ी टक्कर दी है। इस तरह के परिवार की स्थिति यह है कि चैंपियन बेटी के लिए उचित डाइट पूरा कराना मुश्किल हो रहा है, वे इन अत्यंत परीक्षा के समय में मुश्किल से तीन समय के भोजन का प्रबंधन करते हैं।

“हम एक परिवार में सात लोग हैं – दो बड़ी बहन और एक छोटा भाई और बहन, यह लॉकडाउन हम पर बहुत कठिन गुजर रहा है। मेरे पति एक दिहाड़ी मजदूर हैं और कोई काम नहीं होने के कारण आय का कोई स्रोत नहीं है। ”- कुसुम लता, कोमल की माँ ने रेसलिंगटीवी से कहा।

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पानीपत के रहने वाले हरियाणा की पहलवान ने 2019 में बुल्गारिया के सोफिया में 40 किलोग्राम वर्ग में कैडेट वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती। लेकिन लॉकडाउन ने 2024 के पेरिस ओलंपिक के लिए उसकी सभी योजनाओं में खराब भूमिका निभाई है। तमाम बाधाओं के बावजूद, वह अभी भी घर पर ही प्रशिक्षण ले रही है लेकिन आजकल खीरे और फलों के डाइट से ही गुजारा करना पड़ रहा है

“समस्याएँ हैं लेकिन मैं अभी भी अपने सपनों की लिए प्रशिक्षण ले रही हूँ”। शर्मीली कोमल कहती है ।

“यह हमारे लिए कभी आसान नहीं रहा। एक एथलीट की डाइट उसे प्रदान करना हमारे लिए हमेशा एक समस्या रही है क्योंकि हम इस डाइट को अफ़्फोर्ड नहीं कर सकते । लेकिन हमने हमेशा अपनी पूरी कोशिश की है ”। “अब भी, वह अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए खीरे खाती है “, कोमल की माँ ने कहा ।

हरियाणा के पानीपत के एक छोटे से गाँव में जन्मी और पली-बढ़ी टीनएजर भारतीय कुश्ती की सबसे प्रतिभाशाली प्रतिभाओं में से एक हैं। उन्होंने 2017 में अपनी कुश्ती यात्रा शुरू की और 2019 में अपनी वास्तविक उपस्थिति दर्ज की, इसी वर्ष उन्होंने एशियाई और विश्व चैंपियनशिप दोनों में पदक जीते।

कुश्ती के खेल की शुरुआत बाबा ज्ञान राम अखाडा में शुरू हुई, जहां वो परिवार के सदस्यों के साथ दंगल देखने जाती थी ।

उनकी माँ कहती है, “शुरू में अखाड़े के बच्चे उसे धमकाते थे और जब वह मैच देखने जाती थी तो उसे मारते थे । और यह मरना रोज़ की तरह हो गया था। फिर एक दिन उसने अपने पिता से कहा कि वह कुश्ती सीखना चाहती है और इस तरह उसकी यात्रा शुरू हुई ”।

यह घटना साबित करती है कि कोमल सी दिखने वाली कोमल कितनी सख्त है। उसके कोच कृष्ण उसकी कठोरता और अनुशासन की तारीफ करते हैं। वह बहुत अनुशासित और मेहनती है। उसकी अंदर स्वाभाविक है वो आसानी से चीजों को पकड़ लेती है उसको एक बार कुछ बताओ उसे महीनों तक याद रहता है , “कोच कृष्ण।” उसकी ताकत टेडकाउन में है और जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, वह अपनी रणनीति बदलती रहती है जिससे वह घातक हो जाती है और वह कभी हार नहीं मानती “कोच ने बताया ”

कोमल एक बार फिर जिंदगी की इस जंग में हार नहीं मान रही है। जीवन की सभी बाधाओं को अलग करते हुए, हरियाणा की लड़की अब भी अगली साक्षी मलिक बनने का सपना देख रही है – जो भारत की पहली महिला ओलंपिक पदक विजेता है । वह अभी भी दो बार प्रशिक्षण ले रही है और कभी-कभी अपने गांव के स्थानीय अखाड़े में दिन में तीन बार भी। “मैं अपने धीरज पर काम कर रही हूं और अभी के लिए बॉडी-वेट ट्रेनिंग कर रही हूं। मेरे कोच भी मेरी मदद कर रहे है,” कोमल ने कहा ।

किसी भी कठिनाई के बावजूद, “वह बहुत भावुक है और ओलंपिक में मेडल जीतने सपने देखती है,” उसकी माँ ने निष्कर्ष निकाला।

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