एक ऐसा गांव जहाँ हर घर में है पहलवान, लोग इसे ‘पहलवानों के गांव’ के नाम से भी जानते है

By   - 30/06/2020

बागपत का गांव मलकपुर कुश्ती के लिए फेमस है। यहां की माटी से निकली प्रतिभाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दांवपेंच दिखाते हुए जिले का सीना गर्व से चौड़ा किया है। मलकपुर गांव में कई अर्जुन अवार्डी पहलवान होने का नतीजा है कि आज यहां हर बच्चा पहलवान बनना चाहता है। आलम यह है कि सभी गांव वाले भी अपने बच्चे को पहलवान बनाने की सोचते हैं और बच्चे को उसी तरह ट्रेनिंग दी जाती है।

मलकपुर यूपी का अकेला ऐसा गांव है जिसमें हर घर में एक पहलवान है। लड़की हो या लड़का, सबको पहलवानी का शौक है। सभी बच्चे अपने घरवालों से यही कहते है – ‘मैं भी पहलवान बनूंगा और ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करूंगा। मुझे भी अखाड़े में कुश्ती के दांवपेंच सीखने हैं’। यह ज़ज़्बा बागपत के मलकपुर गांव के हर बच्चे में दिखता है। कुश्ती के क्रेज ने इस गांव को ‘पहलवानों का गांव’ बना दिया है।

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गांव के पहलवान अपने सुनहरे कल की तैयारी में जुटे हैं। गांव के अर्जुन अवार्डी पहलवान शोकेंद्र तोमर व राजीव तोमर का कहना है कि कुश्ती पारंपरिक खेल है और गांव में घर-घर में तैयार हो रहे पहलवानों की जितनी तारीफ की जाए कम है। गांव और देश का नाम बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर रहे है।

गांव का सालों पुराना अखाड़ा
गांव में खलीफा दरियाव सिंह पहलवान के चेले – इकबाल और हरपाल साल 1978 से गांव में अखाडा चला रहे हैं। इनमें गांव के ही नहीं शामली, खेकड़ा, लोनी, शाहदरा, छपरौली, किरथल, बड़ौत आदि स्थानों के बच्चे कुश्ती के दाव पेंच सीख रहे हैं। वर्तमान समय में गांव के दोनों अखाड़ों में हज़ारो युवक ट्रेनिंग कर रहे हैं। लगभग हर घर के बच्चे अखाड़े में अभ्यास करते देखे जा सकते हैं। इन अखाड़ों के कारण गांव के बच्चों में परवान चढ़ा पहलवानी का शौक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर जाकर ही रुका।

गांव का नाम रोशन करने वाले पहलवान
सुभाष पहलवान – एशिया चैंपियन और अर्जुन अवार्डी (ओलंपियन 1988 और1992)
शौकेंद्र पहलवान – अर्जुन अवार्डी ओलंपियन (2004)
राजीव तोमर – अर्जुन अवार्डी ओलंपियन (2012)
संदीप तोमर- ओलंपियन (2016)
अंशु तोमर – अंतरराष्ट्रीय महिला मल्ल, यश भारती अवार्ड और भारत केसरी
प्रह्लाद तोमर – अंतरराष्ट्रीय पहलवान
अशोक – अंतरराष्ट्रीय पहलवान
नरेंद्र – अंतरराष्ट्रीय पहलवान

गांव के पहलवानों की मेहनत
मलकपुर गांव में 600 से अधिक सोने-चांदी के तमगे, अर्जुन अवार्ड और अन्य पुरस्कार आ चुके हैं। वर्तमान समय में भी गांव के अखाड़ों में हजारों युवा पहलवान कुश्ती का अभ्यास कर अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। अखाड़ों के खलीफा युवा पीढ़ी को कुश्ती के अभ्यास कराने में जुटे हैं, उन्हें उम्मीद है कि गांव के नए पहलवानों की मेहनत रंग लाएगी।

गांव में हर साल होता है दंगल
एशियन चैंपियन सुभाष पहलवान की देखरेख में हर साल गांव बड़े स्तर पर दंगल का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सबसे बड़ी कुश्ती जीतने वाले पहलवान को एक लाख रुपये का इनाम दिया जाता है। इसके अलावा अलग-अलग भार वर्ग के विजेता पहलवानों को भी इनाम दिए जाते हैं। इसमें दिल्ली, हरियाणा, यूपी आदि राज्यों के पहलवान खेलने और कुश्ती देखने आते हैं।

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